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साहित्य जगत को बड़ा झटका: नहीं रहे हिंदी-मैथिली के मूर्धन्य साहित्यकार रामपुनीत ठाकुर ‘तरुण’, शोक में डूबा समस्तीपुर

समस्तीपुर, 08 जुलाई से(समस्तीपुर डेस्क) हिंदी और मैथिली साहित्य जगत को बुधवार को उस समय गहरा आघात लगा, जब प्रख्यात साहित्यकार, चिंतक और हिन्दी साहित्य सम्मेलन की समस्तीपुर जिला इकाई के अध्यक्ष रामपुनीत ठाकुर ‘तरुण’ का निधन हो गया। मंगलवार की देर रात समस्तीपुर स्थित उनके निजी आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 76 वर्ष के थे और पिछले कई महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे। बुधवार को बूढ़ी गंडक नदी के तट पर पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। रामपुनीत ठाकुर ‘तरुण’ अपने पीछे दो पुत्र प्रणव और छोटू तथा दो पुत्रियां अनामिका और मधुलिका सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

उनके निधन की खबर फैलते ही साहित्यिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में साहित्यकार, बुद्धिजीवी और शुभचिंतक उनके आवास पहुंचे तथा पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।’तरुण’ हिंदी और मैथिली साहित्य के प्रतिष्ठित हस्ताक्षर थे। हिंदी में उनकी चर्चित कृतियों में ‘सुनो शिखर पुरुषो’, ‘आग अंबर में लगेगी’, ‘वेदना का उपहार’ और ‘श्री दुर्गा चरित’ शामिल हैं। वहीं मैथिली में उनकी चर्चित पुस्तक ‘गीत पचीसी’ समेत एक दर्जन से अधिक काव्य कृतियां प्रकाशित हुईं, जिन्होंने उन्हें साहित्य जगत में विशिष्ट पहचान दिलाई।

साहित्यकार हरिनारायण सिंह ‘हरि’, परमानंद प्रभाकर, डॉ. अशोक कुमार सिन्हा, नरेंद्र कुमार सिंह, पंकजदेव, शिवेंद्र पाण्डेय, नरेश विकल, प्रवीण कुमार चुन्नू, विष्णु कुमार केडिया, मुकेश केशरी, मो. जावेद, डॉ. रामसूरत दास, प्रो. जितेंद्र कुमार सिंह, धनेश्वर शर्मा और सत्येंद्र ठाकुर सहित अनेक साहित्यकारों ने उनके निधन को साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके निधन से समस्तीपुर ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार का साहित्यिक जगत शोकाकुल है।

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