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1000 किस्मों के आमों से सजेगा सबौर, राष्ट्रीय आम समागम-2026 में जुटेंगे देशभर के किसान और वैज्ञानिक

बक्सर, 26 जून (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में 27 जून 2026 को आयोजित होने वाला राष्ट्रीय आम समागम-2026 इस बार देश के सबसे बड़े आम महोत्सवों में शामिल होने जा रहा है। आम उत्पादन, अनुसंधान, प्रसंस्करण, विपणन और कृषि नवाचार को समर्पित इस भव्य आयोजन में देश के नौ राज्यों से करीब 1000 किस्मों के आम तथा 2000 से अधिक प्रदर्श आकर्षण का केंद्र होंगे। आयोजन को लेकर किसानों, बागवानों, शोधकर्ताओं और आम प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस राष्ट्रीय समागम में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, दिल्ली, कर्नाटक और उत्तराखंड सहित नौ राज्यों के प्रतिभागी हिस्सा लेंगे।

प्रदर्शनी में दुर्लभ, पारंपरिक एवं उन्नत आम की किस्मों के साथ मूल्य संवर्धित उत्पाद, आधुनिक बागवानी तकनीक, प्रसंस्करण प्रणाली, कृषि स्टार्टअप, वैज्ञानिक नवाचार और उद्यमिता से जुड़े मॉडल भी प्रदर्शित किए जाएंगे। विशेषज्ञ किसानों को आधुनिक तकनीकों और बेहतर विपणन के उपायों की जानकारी देंगे। राष्ट्रीय आम समागम-2026 का मुख्य उद्देश्य आम उत्पादन की नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों का प्रसार, किसानों की आय में वृद्धि, बागवानी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देना तथा किसानों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों और उद्योग जगत के बीच ज्ञान एवं अनुभवों का आदान-प्रदान सुनिश्चित करना है। विश्वविद्यालय का मानना है कि यह आयोजन किसानों के लिए नई संभावनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रभावी मंच साबित होगा।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय आम समागम केवल आम की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारतीय बागवानी, वैज्ञानिक अनुसंधान और किसान समृद्धि का राष्ट्रीय मंच है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय किसानों को उन्नत किस्मों, मूल्य संवर्धन, आधुनिक प्रसंस्करण तकनीकों और बेहतर विपणन व्यवस्था से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इससे आम उत्पादकों की आय बढ़ेगी और बिहार आम उत्पादन व कृषि नवाचार के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान स्थापित करेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदेश एवं देशभर के किसानों, उद्यान प्रेमियों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों और आम नागरिकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में अधिकाधिक संख्या में भाग लेने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समागम बिहार की बागवानी क्षमता को नई पहचान देने के साथ किसानों के लिए नए अवसरों के द्वार भी खोलेगा।

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