समस्तीपुर, 11 जून (मोहम्मद जमशेद) पूर्व मध्य रेल के समस्तीपुर मंडल में आपातकालीन आरक्षण कोटे को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। मंडल क्षेत्र में 11 लोकसभा सांसद, 6 राज्यसभा सांसद और दो दर्जन से अधिक विधान परिषद सदस्यों का क्षेत्र आता है, लेकिन आरोप है कि जरूरतमंद यात्रियों को आपातकालीन कोटे का लाभ आसानी से नहीं मिल पाता। सूत्रों के अनुसार समस्तीपुर मंडल से संचालित ट्रेनों में आपातकालीन कोटे की सीटें सीमित हैं। ऐसे में मंडल प्रशासन के सामने पात्र यात्रियों और जनप्रतिनिधियों की अनुशंसाओं के बीच संतुलन बनाना चुनौती बन जाता है।

रेलवे से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर दावा किया कि कई बार सांसदों द्वारा भेजे गए आपातकालीन कोटा संबंधी पत्रों का भी क्रियान्वयन संभव नहीं हो पाता, क्योंकि उपलब्ध सीटों की संख्या बेहद कम रहती है। कुछ कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि आपातकालीन कोटे के आवंटन को लेकर बाहरी दबाव बनाए जाते हैं। वहीं यह दावा भी किया गया कि कोटे के दुरुपयोग और सिफारिशी पत्रों के गलत इस्तेमाल की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। रेल कर्मचारियों के बीच यह मांग भी उठी है कि पिछले एक वर्ष में जारी किए गए आपातकालीन कोटे का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाए।

उनका कहना है कि यदि आवंटन प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से सामने आ जाए तो कोटे के दुरुपयोग और पक्षपात के आरोपों पर स्वतः विराम लग सकता है।फिलहाल रेलवे प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में आपातकालीन कोटे के आवंटन को लेकर उठ रहे सवाल और आरोप चर्चा का विषय बने हुए हैं।


















