आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में जम्मू-कश्मीर, जम्मू से सुप्रसिद्ध कवयित्री शम्मा भलेसी जी की एक ग़ज़ल

हसीं बहारों की लौटे कभी वो शाम लिये।
कि जिसका दिल में सदा रहते हम हैं नाम लिए।
तरस वो खाये कभी हाले ज़ार पर मेरे,
कभी झुके वो नज़र का मेरी सलाम लिये।
सजी हो बज़्मे तरब सामने वो मेरे हो,
सरूर में रहें उसकी नज़र का जाम लिए।
ये चाँद रात भी आई है सिसकियां लेकर,
हवा के दोश पे किसका है ये पयाम लिए।
कभी तो लौट के आये गा जो है परदेसी,
तमाम उम्र कटी है ख्याले -खाम लिए
~ शम्मा भलेसी


















