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135 करोड़ कमाने वाला आरा जंक्शन फिर भी उपेक्षित: 24 साल से नहीं रुकी पटना-इंदौर एक्सप्रेस, यात्रियों में बढ़ा आक्रोश

पटना, 11 जून (पटना डेस्क) पूर्व मध्य रेलवे के प्रमुख और सबसे अधिक राजस्व देने वाले स्टेशनों में शामिल आरा जंक्शन एक बार फिर अपनी उपेक्षा को लेकर चर्चा में है। सालाना करीब 135 करोड़ रुपये का राजस्व देने वाले इस महत्वपूर्ण स्टेशन पर आज भी कई प्रमुख ट्रेनों का ठहराव नहीं है। सबसे ज्यादा नाराजगी पटना-इंदौर एक्सप्रेस के स्टॉपेज को लेकर है, जो 24 वर्षों से इस स्टेशन को नजरअंदाज करती आ रही है। वर्ष 2002 में तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार द्वारा 19313/14 पटना-इंदौर एक्सप्रेस की शुरुआत की गई थी। उस समय ट्रेन को पटना जंक्शन से सीधे मुगलसराय (अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन) तक चलाया गया। आश्चर्य की बात यह है कि शाहाबाद क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन आरा को इस सेवा से बाहर रखा गया और आज तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि भोजपुर जिले और आसपास के क्षेत्रों से हर वर्ष हजारों श्रद्धालु उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर के दर्शन के लिए जाते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में छात्र, व्यवसायी और कामगार इंदौर में रहते हैं। बावजूद इसके उन्हें ट्रेन पकड़ने के लिए पटना या बक्सर जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त बर्बादी होती है। यात्रियों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि आरा जंक्शन से होकर चार राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन होता है, लेकिन इनमें से किसी का भी यहां ठहराव नहीं है। जबकि मानसी, नवगछिया, दानापुर और साहिबगंज जैसे कई स्टेशनों को समय-समय पर राजधानी एक्सप्रेस का स्टॉपेज मिल चुका है। रेल यात्री पंकज कुमार का कहना है कि पटना-इंदौर एक्सप्रेस का आरा में ठहराव जनहित की मांग है।

वहीं रोहित कुमार के अनुसार राजस्व और यात्री संख्या के आधार पर आरा बड़े स्टेशनों की श्रेणी में शामिल हो चुका है, इसलिए यहां प्रमुख ट्रेनों का ठहराव मिलना चाहिए। राम बाबू सिंह का कहना है कि ट्रेन नहीं रुकने के कारण यात्रियों का चार से पांच घंटे अतिरिक्त समय बर्बाद हो जाता है। रेल फैन क्लब आरा के सदस्य संदीप कुमार ने कहा कि भारी राजस्व और लाखों यात्रियों की निर्भरता के बावजूद स्टेशन को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। अब यात्रियों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की निगाहें रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड पर टिकी हैं कि आखिर आरा जंक्शन को उसका हक कब मिलेगा।

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