पटना, 06 जून (अविनाश कुमार) बिहार विधान परिषद उपचुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में उम्मीदवारों के नाम लगभग तय हो चुके हैं, लेकिन एक सीट को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। नामांकन की प्रक्रिया के पांच दिन बीत जाने के बाद शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने चार-चार सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी। वहीं राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के हिस्से की एक सीट भी लगभग तय मानी जा रही है। इसके बावजूद एक सीट पर अंतिम फैसला नहीं हो पाने से राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों के अनुसार, इस सीट को लेकर केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के संरक्षक जीतन राम मांझी तथा केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के बीच जोरदार दावेदारी चल रही है।

दोनों नेता अपनी-अपनी पार्टी के उम्मीदवार को मैदान में उतारने के लिए प्रयासरत हैं। बताया जा रहा है कि अंतिम निर्णय भाजपा नेतृत्व के साथ होने वाली राजनीतिक सहमति के बाद ही संभव होगा।उधर, रालोमो प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने इस सीट की दावेदारी काफी पहले से सुनिश्चित कर रखी थी। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव परिणामों के समय ही उनके पुत्र दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की रणनीति तय कर ली गई थी। दीपक प्रकाश किसी सदन के सदस्य नहीं थे, जबकि उनकी पत्नी विधायक निर्वाचित हुई थीं। मंत्री पद की शपथ लेने के बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत छह माह के भीतर उन्हें किसी सदन का सदस्य बनाना आवश्यक था।

ऐसे में रालोमो के हिस्से की सीट पर दीपक प्रकाश का नाम लगभग तय माना जा रहा है और अब केवल औपचारिक घोषणा शेष है। दूसरी ओर, महागठबंधन के खाते में तीन सीटें मानी जा रही हैं, जिनमें से एक पर उसकी जीत लगभग सुनिश्चित बताई जा रही है। ऐसे में एनडीए की बची हुई सीट पर मुकाबला रोचक होने की संभावना बढ़ गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मांझी और चिराग में से किसका पलड़ा भारी पड़ता है और क्या यह सीट उपचुनाव का सबसे दिलचस्प राजनीतिक रणक्षेत्र बनती है।

















