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गन्ना क्रांति की हुंकार: सबौर में वैज्ञानिकों का मंथन, अब बदलेगा खेती का पूरा सिस्टम

बक्सर, 29 अप्रैल (विक्रांत) बिहार में गन्ना उत्पादन को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में एक दिवसीय उच्च स्तरीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। “बिहार में गन्ना खेती का उन्नयन: संभावनाएँ, चुनौतियाँ एवं अवसर” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में देशभर के कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और खेती को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने पर जोर दिया। कार्यक्रम का आयोजन इंडियन सोसाइटी ऑफ एग्रोनॉमी के बीएयू सबौर चैप्टर द्वारा किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य गन्ना उत्पादन प्रणाली को सटीक कृषि, जलवायु-स्मार्ट तकनीकों और संसाधन दक्षता आधारित प्रबंधन के जरिए पूरी तरह बदलना था।

निदेशक अनुसंधान डॉ. अनिल कुमार सिंह के संयोजन में आयोजित इस कार्यशाला की अध्यक्षता निदेशक प्रसार डॉ. एस. के. पाठक ने की। स्वागत भाषण में डॉ. संजय कुमार ने research–extension–innovation के समन्वय को मजबूत करने और डेटा आधारित खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।मुख्य वक्ता डॉ. देवेंद्र सिंह ने गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण पेश किया। उन्होंने क्षेत्र-विशिष्ट किस्मों के चयन, साइट-स्पेसिफिक न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट, रियल-टाइम नाइट्रोजन प्रबंधन और ड्रिप फर्टिगेशन जैसी तकनीकों को उत्पादकता का आधार बताया। साथ ही डिजिटल एग्रीकल्चर, रिमोट सेंसिंग और डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के उपयोग को अनिवार्य बताया।

उन्होंने कीट व रोग प्रबंधन के लिए जैव-नियंत्रण, प्रतिरोधी किस्मों और पूर्वानुमान आधारित तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया। इसके अलावा इंटरक्रॉपिंग, कार्बन संचयन और उत्पादन के बाद सुक्रोज रिकवरी बढ़ाने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।कुलपति ने अपने संदेश में कहा कि गन्ना खेती का भविष्य विज्ञान और डिजिटल तकनीकों के समन्वय में है। वहीं डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बहु-विषयक अनुसंधान, मशीनीकरण और प्रिसिजन एग्रोनॉमी को प्राथमिकता देने की बात कही।चर्चा सत्र में विशेषज्ञों ने उत्पादन अंतर, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और तकनीक अपनाने की चुनौतियों पर गंभीर मंथन किया। अंत में यह संकल्प लिया गया कि उन्नत तकनीकों और सहयोगात्मक प्रयासों से बिहार को गन्ना उत्पादन में अग्रणी बनाया जाएगा।

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