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फोरलेन का सपना फिर अधूरा: भागलपुर, हंसडीहा प्रोजेक्ट पर दोबारा ब्रेक, बदले एस्टिमेट ने बढ़ाई चिंता

पटना, 29 अप्रैल (पटना डेस्क) झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित भागलपुर-भलजोर (हंसडीहा) फोरलेन परियोजना एक बार फिर अड़चनों में घिर गई है। ढाई साल तक जमीन अधिग्रहण विवाद में उलझी रहने के बाद अब यह महत्वाकांक्षी सड़क योजना प्राक्कलन (एस्टिमेट) में बदलाव के कारण अटक गई है। नतीजा निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीदों पर फिर से पानी फिर गया हैकरीब 65 किलोमीटर लंबी इस फोरलेन सड़क को दो चरणों में विकसित किया जाना है। पहले चरण में अलीगंज बाइपास थाना से ढाकामोड़ तक और दूसरे चरण में ढाकामोड़ से हंसडीहा (भलजोर) तक निर्माण प्रस्तावित है। पहले जमीन अधिग्रहण को लेकर भारी विवाद रहा, जिसके चलते 22 बार टेंडर प्रक्रिया टल गई और अंततः दो साल पहले इसे रद्द करना पड़ा था।

हाल ही में भूमि संबंधी समस्याएं सुलझने के बाद काम शुरू होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब नई तकनीकी अड़चन सामने आ गई है।सूत्रों के मुताबिक एजेंसी चयन के लिए 28 अप्रैल को टेंडर खोलने की तारीख तय थी, लेकिन प्राक्कलन में बदलाव के कारण इसे एक महीने के लिए टाल दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना की डिजाइन और लागत में संशोधन किया जा रहा है, जिसके चलते प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है। नए एस्टिमेट के तहत सड़क की चौड़ाई में भी कटौती की गई है। पहले जहां 55 से 60 मीटर चौड़ी सड़क का प्रस्ताव था, अब इसे घटाकर 45 से 50 मीटर किया जा रहा है। साथ ही सर्विस लेन और अन्य ढांचागत कार्यों में भी बदलाव किए गए हैं।

हालांकि, बाइपास थाना से खीरीबांध के बीच करीब एक किलोमीटर हिस्से में आठ लेन सड़क बनाने की योजना बरकरार है। डिजाइन में बदलाव का असर लागत पर भी पड़ेगा। अनुमान है कि कुल परियोजना लागत में 35 से 40 करोड़ रुपये तक की कमी आ सकती है। पहले चरण में भागलपुर से ढाकामोड़ तक सड़क निर्माण पर लगभग 925 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।यह सड़क भागलपुर क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस मार्ग से रोजाना 7 से 8 हजार भारी वाहनों समेत करीब 35 से 40 हजार वाहन गुजरते हैं। खराब सड़क और बढ़ते ट्रैफिक के कारण अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।

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