बक्सर, 29 अप्रैल (विक्रांत) मानवता और ममता का भावुक कर देने वाला दृश्य आज उस समय देखने को मिला, जब बक्सर समाहरणालय परिसर में साढ़े तीन वर्ष की एक मासूम बच्ची को कर्नाटक के निःसंतान दंपति को विधिवत सौंपा गया। इस दौरान मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों की आंखें भी नम हो गईं, वहीं बच्ची को गोद में लेते ही दंपति की खुशी आंसुओं में छलक पड़ी। यह पूरा दत्तक ग्रहण कार्यक्रम जिला पदाधिकारी श्रीमती साहिला की उपस्थिति में संपन्न हुआ। जैसे ही बच्ची को दंपति को सौंपा गया, वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा। वर्षों से संतान सुख की प्रतीक्षा कर रहे इस दंपति के लिए यह पल किसी सपने के सच होने जैसा था, वहीं मासूम को भी आज एक सुरक्षित और स्नेहिल परिवार का आंचल मिल गया।

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि जिन नवजात या छोटे बच्चों को किसी कारणवश लावारिस छोड़ दिया जाता है, उन्हें विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थानों में सुरक्षित रखा जाता है। यहां उनका पालन-पोषण पूरी देखरेख और सुविधाओं के साथ किया जाता है, ताकि उन्हें भविष्य में एक बेहतर जीवन मिल सके। दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और कानूनी ढांचे के तहत होती है। इच्छुक दंपति केंद्रीय दत्तक संसाधन प्राधिकरण (CARA) की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और जन्म प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेजों के साथ पंजीकरण अनिवार्य होता है। आवेदन के बाद 30 दिनों के भीतर सभी जरूरी दस्तावेज ‘केयरिंग पोर्टल’ पर अपलोड किए जाते हैं।

इसके पश्चात गृह अध्ययन रिपोर्ट, प्रतीक्षा सूची, बच्चों का मिलान, आरक्षण स्वीकृति और न्यायालयीन प्रक्रिया जैसी कई चरणों से गुजरना पड़ता है। दंपति की शारीरिक, मानसिक और आर्थिक स्थिति का भी गहन मूल्यांकन किया जाता है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि पति-पत्नी के बीच कम से कम दो वर्षों का स्थिर वैवाहिक संबंध हो। इस मौके पर उप विकास आयुक्त श्रीमती निहारिका छवि, सहायक समाहर्ता, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। यह घटना न केवल एक परिवार की खुशी का कारण बनी, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गई कि दत्तक ग्रहण के जरिए कई मासूमों को नया जीवन और पहचान दी जा सकती है।














