पटना, 29 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार सरकार ने राज्य के किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और पारंपरिक खेती को आधुनिक स्वरूप देने के उद्देश्य से मखाना (फॉक्स नट) को बढ़ावा देने के लिए महत्वाकांक्षी “मखाना विकास योजना” की शुरुआत की है। देश में मखाना उत्पादन में अग्रणी बिहार अब इस योजना के जरिए उत्पादन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने की तैयारी में है। सरकार का फोकस खास तौर पर कोसी, मिथिलांचल और सीमांचल के उन इलाकों पर है, जहां तालाब और जल संसाधनों की प्रचुरता के कारण मखाना की खेती व्यापक स्तर पर होती है।

कटिहार, पूर्णिया, मधुबनी, किशनगंज, सुपौल, अररिया, मधेपुरा, सहरसा, दरभंगा और खगड़िया जैसे जिलों के किसानों को इस योजना से सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। योजना के तहत किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक और बेहतर उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही पुराने संसाधनों को बदलकर नई किट देने की व्यवस्था भी की गई है, ताकि उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में वृद्धि हो सके। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय को दोगुना करना और मखाना को वैश्विक पहचान दिलाना है। सब्सिडी के मोर्चे पर भी सरकार ने बड़ा दांव खेला है।

मखाना की खेती की इकाई लागत लगभग 97 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर तय की गई है, जिस पर 75 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। यानी किसानों को प्रति हेक्टेयर 71,600 रुपये तक की सहायता मिल सकती है। इसके अलावा माइक्रो से लेकर बड़ी यूनिट तक 5 लाख से 3.5 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। ब्रांडिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार सक्रिय है। मखाना बिक्री केंद्र स्थापित करने पर 10 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी, जबकि राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लेने वाले उद्यमियों को 25 लाख रुपये तक का सहयोग मिलेगा। निर्यात को आसान बनाने के लिए सर्टिफिकेशन पर भी 2.5 लाख रुपये तक की मदद तय की गई है। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान का बिहार का मूल निवासी होना अनिवार्य है। आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक खाता और भूमि से जुड़े दस्तावेज जरूरी होंगे। किसान नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। कुल मिलाकर, यह योजना “सफेद सोना” कहे जाने वाले मखाना को नई पहचान देने के साथ ही किसानों की किस्मत बदलने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।













