नई दिल्ली 24 अप्रैल (अशोक “अश्क”) पश्चिम एशिया में तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत का बड़ा प्रदर्शन करते हुए खाड़ी क्षेत्र में मौजूदगी और मजबूत कर दी है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, ‘यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश’ विमानवाहक पोत अब पश्चिम एशिया के रणनीतिक क्षेत्र में पहुंच चुका है। इस तैनाती के साथ ही इलाके में अमेरिकी नौसेना की शक्ति अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है, जिससे संभावित टकराव की आशंकाएं भी गहरा गई है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि 23 अप्रैल को यह युद्धपोत हिंद महासागर में उनके जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में सक्रिय था। जारी तस्वीरों में विमानवाहक पोत के डेक पर बड़ी संख्या में अत्याधुनिक लड़ाकू विमान तैनात नजर आए, जो किसी भी समय कार्रवाई के लिए तैयार दिख रहे हैं।खाड़ी क्षेत्र में पहले से ही ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ अरब सागर में और ‘यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड’ रेड सी इलाके में तैनात हैं।

ऐसे में तीन विमानवाहक पोतों की एक साथ मौजूदगी अमेरिकी नौसेना की आक्रामक रणनीति का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह तैनाती हवाई हमलों, समुद्री निगरानी और नाकेबंदी की क्षमता को कई गुना बढ़ा देती है। बताया जा रहा है कि ‘यूएसएस बुश’ ने अफ्रीका के दक्षिणी छोर केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबा सफर तय किया, ताकि रेड सी और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से बचा जा सके, जहां हूती विद्रोहियों की ओर से खतरा बना हुआ है। यह रणनीतिक फैसला अमेरिकी नौसेना की सतर्कता और जोखिम प्रबंधन को दर्शाता है।

इस बीच ईरान के साथ बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है। रक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह तैनाती क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए की गई है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी सैन्य मौजूदगी से हालात और भड़क सकते हैं। पश्चिम एशिया में पहले से ही अस्थिर माहौल के बीच यह कदम बड़े सैन्य संघर्ष की आशंकाओं को और हवा दे रहा है।

















