पटना, 24 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार की सियासत में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक पल दर्ज हुआ, जब सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर दिया। 15 अप्रैल 2026 को शपथ लेने के बाद यह उनके नेतृत्व की पहली बड़ी परीक्षा थी, जिसे उन्होंने पूरे आत्मविश्वास और मजबूती के साथ पार कर लिया। इस जीत के साथ ही राज्य में भारतीय जनता पार्टी के समर्पित नेता के रूप में उनका नेतृत्व और मजबूत हो गया है।विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार द्वारा बुलाए गए विशेष सत्र में सुबह से ही सियासी हलचल तेज रही।

सत्ता पक्ष के विधायकों में जहां उत्साह साफ नजर आया, वहीं विपक्ष भी हमलावर तेवर में दिखा। बहुमत परीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के तीखे सवालों का जवाब संयम और आक्रामकता के संतुलन के साथ दिया।सदन को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक संघर्ष का जिक्र करते हुए लालू प्रसाद यादव के शासनकाल को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि वे शौक से राजनीति में नहीं आए, बल्कि उस दौर के कथित अन्याय और अत्याचार ने उन्हें इस राह पर चलने के लिए मजबूर किया। उन्होंने दो टूक कहा कि उनकी राजनीति का उद्देश्य बिहार को ‘कुशासन’ के दौर में वापस जाने से रोकना है।

मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की प्राथमिकताएं बताते हुए ‘ट्रिपल सी’ Crime, Corruption और Communalism पर सख्त रुख अपनाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार द्वारा स्थापित सुशासन की परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा और कानून का राज हर हाल में कायम रखा जाएगा। बहस के दौरान उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र यादव ने राज्य की आर्थिक स्थिति पर विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बिहार के पास विकास के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। वहीं, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर नीतीश कुमार की नीतियों की सराहना की।

सत्र के दौरान उस समय दिलचस्प स्थिति बनी जब एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान ने भी सरकार के कुछ कार्यों की तारीफ करते हुए नए मुख्यमंत्री को शुभकामनाएं दी।यह सत्र केवल बहुमत साबित करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बिहार की राजनीति में नई दिशा और सख्त प्रशासनिक रुख का संकेत भी दे दिया है।













