• Home
  • फ़िल्म
  • पत्रकार से विलेन तक: अन्ना का खौफ, जिनकी खामोश आँखें बन गई विलेन की पहचान
Image

पत्रकार से विलेन तक: अन्ना का खौफ, जिनकी खामोश आँखें बन गई विलेन की पहचान

नई दिल्ली, 20 अप्रैल (अशोक “अश्क”) फिल्मी पर्दे पर अक्सर विलेन को चिल्लाते हुए, डरावने चेहरे बनाते हुए देखा जाता है, लेकिन एक ऐसा कलाकार था, जो बिना आवाज़ उठाए, बिना डरावनी आँखें बनाये, बस अपनी शातिर आँखों से ही दर्शकों के पसीने छुड़ा देता था। हम बात कर रहे हैं गंगासानी रामी रेड्डी की, जिनका नाम भले ही सबको याद न हो, लेकिन उनका चेहरा और उनका खौफनाक अंदाज 90 के दशक के फिल्मों के खतरनाक सीन से जुड़ा हुआ है।

करीब 250 फिल्मों में अपनी दहशत फैलाने वाले रामी रेड्डी ने विलेनगिरी की एक नई परिभाषा दी थी। उनकी सबसे बड़ी खासियत थी उनका डायलॉग बोलने का अंदाज बिल्कुल सपाट, बिना किसी उतार-चढ़ाव के, एक ही सुर में। यही अंदाज सुनने में इतना डरावना लगता था कि वह बिना चीखे-चिल्लाए दर्शकों को दहशत में डाल देते थे। फिल्म ‘वक्त हमारा है’ में ‘कर्नल शिकारा’ के रूप में उनका किरदार आज भी लोगों के जहन में ताजा है।

इसी तरह फिल्म ‘हकीकत’ में उनका ‘अन्ना’ का किरदार और उनकी सुर्ख लाल आँखें भी दर्शकों को कभी नहीं भूलेंगी। हालाँकि, रामी रेड्डी का करियर पर्दे पर विलेन बनने से पहले पत्रकारिता में था। आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के रहने वाले रामी ने हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म की पढ़ाई की और ‘MF Daily’ अखबार में काम किया। लेकिन उनका अंदर का कलाकार उन्हें चैन से बैठने नहीं देता था, और फिर उन्होंने पत्रकारिता को अलविदा कहकर तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री का रुख किया।

1989 में आई फिल्म ‘अंकुशम’ में उनका डायलॉग ‘स्पॉट पेदथा’ इतना हिट हुआ कि वह रातों-रात मशहूर हो गए। जब इसी फिल्म का हिंदी रीमेक ‘प्रतिबंध’ बना, तो उन्होंने वही किरदार फिर से निभाया और बॉलीवुड में भी अपनी पहचान बना ली। उनकी साउथ इंडियन एक्सेंट वाली टोन में बोले गए डायलॉग “तबाही की आंधी और बर्बादी के तूफान का नाम है चिकारा”, “दुश्मन के पास अगर ताकत के साथ-साथ दिमाग भी हो… तो वार उसके हाथ पर नहीं, गर्दन पर करना चाहिए” उनकी पहचान बन गई। लेकिन फिल्मी दुनिया का यह खौफनाक सितारा 2010 में एक काले दौर से गुजरने लगा। उनकी सेहत बिगड़ी, और उन्हें लिवर कैंसर का पता चला। कैंसर ने उनकी किडनी को भी प्रभावित किया और देखते ही देखते उनका शरीर पूरी तरह से कमजोर हो गया। कैंसर से बहादुरी से लड़ते हुए 14 अप्रैल, 2011 को महज 52 साल की उम्र में रामी रेड्डी ने इस दुनिया को अलविदा ले लिया। आज भले ही रामी रेड्डी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आँखों की खामोशी और उनकी बेमिसाल एक्टिंग हमेशा फैंस के दिलों में जिंदा रहेगी। वह साबित कर गए कि डर पैदा करने के लिए चीखने-चिल्लाने की जरूरत नहीं होती, बस नजरों का खौफ ही काफी होता है।

Releated Posts

हॉलीवुड में धमाका करने को तैयार विद्युत जामवाल, स्ट्रीट फाइटर ट्रेलर में दिखा खतरनाक अवतार

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (अशोक “अश्क”) बॉलीवुड में अपनी दमदार एक्शन और मार्शल आर्ट स्किल्स से पहचान बनाने…

सदा के लिए खामोश हो गई सुरों की मल्लिका: आशा भोसले के निधन से देश शोक में, अरुणा ईरानी फूट-फूटकर रो पड़ी

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (अशोक “अश्क”) भारतीय संगीत जगत को गहरा आघात पहुंचाते हुए लेजेंड्री प्लेबैक सिंगर आशा…

बॉक्स ऑफिस पर अजय देवगन करेंगे धमाल: 5 फिल्मों से आने वाली है सुनामी, ‘गोलमाल 5’ से लेकर ‘दृश्यम 3’ भी है लिस्ट में

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (अशोक “अश्क”) बॉलीवुड के सिंघम स्टार अजय देवगन एक बार फिर बड़े पर्दे पर…

काका से डिस्को किंग तक, कैसे मिथुन ने छीन लिया राजेश खन्ना का मास क्रेज

नई दिल्ली, 13 अप्रैल (अशोक “अश्क”) 70 के दशक की शुरुआत में बॉलीवुड पर राज था राजेश खन्ना…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top