नई दिल्ली, 20 अप्रैल (अशोक “अश्क”) ईरान और अमेरिका के बीच पहले दौर की वार्ता में असफलता के बाद, युद्ध की कूटनीतिक कोशिशें लगातार जारी हैं। लेकिन अब तनाव और भी बढ़ गया है, जब अमेरिकी नौसेना ने ईरान के झंडे वाले एक कार्गो जहाज को कब्जे में ले लिया। यह घटना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी को पार करने की कोशिश करने के दौरान हुई, और इससे दोनों देशों के बीच हालात और भी तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना की जानकारी देते हुए बताया कि ईरानी जहाज ने अमेरिकी नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश की, और यही कारण था कि इसे कब्जे में लिया गया।

ट्रंप के बयान ने अमेरिका के सख्त रुख को स्पष्ट किया, जबकि दूसरी ओर, ईरान ने इसका करारा जवाब दिया है। ईरान ने इस घटना के बाद अमेरिकी सेना पर पलटवार करते हुए दावा किया है कि उसने ओमान की खाड़ी में ड्रोन बोट से अमेरिकी सैन्य जहाजों को निशाना बनाया। हालांकि, ईरान की ओर से इस हमले के परिणाम और नुकसान के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, यह हमला अमेरिका की कार्रवाई का प्रतिकार था, लेकिन इसकी सटीकता और प्रभाव का विवरण सामने नहीं आया। इस बीच, पाकिस्तान में होने वाली अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता पर भी अनिश्चितता बनी हुई है।

ईरान ने इन वार्ताओं को लेकर स्पष्ट किया है कि इस समय कोई रचनात्मक वार्ता संभव नहीं दिख रही। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए (IRNA) ने रविवार को जारी बयान में कहा कि इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ होने वाली वार्ता की खबरें पूरी तरह से झूठी और गलत हैं। ईरान ने अमेरिकी मीडिया द्वारा जारी खबरों को प्रचार का हिस्सा बताते हुए आरोप लगाया कि ये कदम सिर्फ दबाव बनाने और ईरान पर झूठे आरोप लगाने के लिए उठाए गए हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने बताया कि अमेरिकी सैनिकों द्वारा एक ईरानी कार्गो जहाज को जब्त करने के बाद, ईरान की सेना ने अमेरिकी सैन्य जहाजों पर ड्रोन हमले किए। हालांकि, इस हमले के पैमाने के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

ईरान का यह दावा क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाने वाला साबित हो सकता है, क्योंकि दोनों देशों के बीच सीजफायर के बावजूद विवाद लगातार गहरा रहा है। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि जब तक अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी, तब तक मतभेद बने रहेंगे। ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और युद्ध अपराधों की धमकी करार दिया। ईरान का स्पष्ट संदेश था कि अमेरिकी नाकाबंदी को और सख्त करना और आरोपों का खेल जारी रखना दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समाधान के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट है।यह घटनाक्रम इस बात की पुष्टि करता है कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की संभावना और भी कम हो सकती है, और संघर्ष के और बढ़ने के खतरे को नकारा नहीं जा सकता।
















