नई दिल्ली, 16 अप्रैल (अशोक “अश्क”) पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी और अमेरिका द्वारा रूस-ईरान से तेल खरीद पर दी गई अस्थायी छूट खत्म किए जाने के बावजूद भारत ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वह रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद नहीं करेगा। सरकार के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, यह फैसला पूरी तरह “राष्ट्रीय हित” और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।मंगलवार को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात कर इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की।

इससे पहले विदेश सचिव विक्रम मिसरी की वॉशिंगटन यात्रा के दौरान भी ऊर्जा सहयोग को लेकर गहन वार्ता हुई थी।अधिकारियों के मुताबिक, होर्मुज मार्ग बंद होने से भारत की 60% तक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। इराक और कुवैत से आपूर्ति लगभग ठप है, जबकि यूएई और सऊदी अरब से सीमित आपूर्ति हो रही है। ऐसे में रूस ही एकमात्र भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है।

रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात बढ़कर 2.06 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गया, जो फरवरी के मुकाबले लगभग दोगुना है। कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी 46% तक पहुंच गई है। हालांकि अब रूस पहले जैसी छूट नहीं दे रहा और भारतीय कंपनियां बाजार भाव पर तेल खरीद रही हैं। इस बीच, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने छूट खत्म करने का ऐलान करते हुए सख्त रुख दिखाया है।

वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत अपने 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा जरूरतों से समझौता नहीं करेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह भारत की ऊर्जा कूटनीति की बड़ी परीक्षा है, जहां संतुलन साधते हुए देश अपने हितों को प्राथमिकता दे रहा है।
















