
साहित्यिक आंगन में आज उत्तर प्रदेश बिजनौर की सुप्रसिद्ध शायरा अफ़रोज़ अज़ीज़ जी की ग़ज़ल
दिल के सोये हुए ज़ख्मो को जगाने निकले।
आज फिर बज़्मे मोहब्त को सजाने निकले।
वो हसीं ख्याब जो आंखों में सजाएं मैंने।
किस लिये आप वही ख्याब चुराने निकले।।
भूल जाये ना कहीं दिल ये तेरे जोरो सितम।
हम वही सोया हुआ दर्द जगाने निकले।।
तेरे बोसीदा खतूत आज भी हैं पास मेरे।
उन खतों से तेरी यादों के खजाने निकले।।
हर खुशी बक्शी है दिन के उजालों ने मगर।
चाँद निकला तो कई दर्द पुराने निकले।।
घेर रखा था जिसे ग़म के अंधेरो ने अज़ीज़।
हम उसी शाम को रंगीन बनाने निकले।।
~ अफ़रोज़ अज़ीज़

















