पटना, 09 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार की सियासी गर्माहट गुरुवार को चरम पर पहुँच गई जब जनता दल (यूनाइटेड) ने राज्य में अगली सरकार के नेतृत्व को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी। जेडीयू नेता और संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने साफ कर दिया कि बिहार में बड़ी पार्टी भाजपा है और इसलिए अगली सरकार का नेतृत्व उसी को करना है। यह बयान राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहे सस्पेंस और ‘खेला’ की अटकलों पर विराम लगाता प्रतीत हो रहा है।

चौधरी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “बिहार में भाजपा बड़ी पार्टी है और नेतृत्व उन्हें ही करना है। हम एनडीए के साथ हैं।” उन्होंने आगे बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद कैबिनेट स्वतः भंग हो जाएगी, लेकिन उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि इस्तीफा कब होगा और नई सरकार कब शपथ लेगी। इस बयान के साथ ही बिहार की सियासी तस्वीर साफ हो गई है और माना जा रहा है कि बीजेपी के नेतृत्व में ही एनडीए की नई सरकार का गठन होगा। सूत्रों की मानें तो नई सरकार की शपथ 14 अप्रैल या उसके बाद किसी शुभ मुहूर्त पर हो सकती है।

अगर ऐसा हुआ, तो यह दो दशक से बिहार में गठबंधन में रहने के बाद पहली बार होगा जब भाजपा का कोई नेता मुख्यमंत्री बनेगा। इस ऐतिहासिक बदलाव से राज्य की राजनीति में नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अगले कदमों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार आज दिल्ली जा रहे हैं और 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य की शपथ लेंगे। चौधरी ने यह भी कहा कि नीतीश का दिल्ली जाना बिहार को सही नहीं लगा, लेकिन यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है और जेडीयू को इसके प्रति बाध्य होना पड़ा।इस्तीफे को लेकर विजय चौधरी ने कहा कि कैबिनेट की बैठक अनिवार्य नहीं है। उनका यह बयान यह संकेत देता है कि सांसद की शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार किसी भी दिन अपना इस्तीफा दे सकते हैं। एनडीए विधायक दल की बैठक के बाद ही अंतिम निर्णय सामने आएगा।बिहार की सियासत में यह मोड़ नई राजनीति का संकेत दे रहा है, जहां वर्षों से नेतृत्व कर रहे नीतीश कुमार के स्थान पर पहली बार भाजपा का नेतृत्व नजर आने वाला है।

















