पटना, 04 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार की कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया, जिसने पुलिस महकमे और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। पांडेय ने दावा किया कि बिहार में अपहरण की संस्कृति किसी अपराधी गिरोह ने नहीं, बल्कि एक आईपीएस अधिकारी की ‘रणनीति’ से शुरू हुई थी।

उन्होंने कहा कि बेतिया और बगहा क्षेत्र में डकैतों का आतंक चरम पर था और पुलिस उन पर काबू पाने में नाकाम साबित हो रही थी। इसी दौरान एक तत्कालीन एसपी, जो आंध्र प्रदेश कैडर से प्रतिनियुक्ति पर आए थे, ने अपराधियों से संपर्क साधा। पांडेय के अनुसार, उस अधिकारी ने डकैती छोड़कर फिरौती के लिए अपहरण करने का ‘विकल्प’ सुझाया, ताकि अपराध के आंकड़े कागजों में कम दिखें और दबाव घटे। पूर्व डीजीपी ने बताया कि उस दौर में हालात इतने भयावह थे कि रोजाना 10 से 20 अपहरण की घटनाएं होती थीं, जिनमें कई दर्ज भी नहीं होती थी।

लोग डर के कारण चुपचाप फिरौती देकर अपने परिजनों को छुड़ाते थे। उन्होंने इस स्थिति को ‘किडनैपिंग इंडस्ट्री’ करार दिया।हालांकि पांडेय ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जमकर सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में इस ‘इंडस्ट्री मॉडल’ को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि आज स्थिति काफी बेहतर है और लोग देर रात भी अपेक्षाकृत सुरक्षित महसूस करते हैं। इसके साथ ही पांडेय ने समाज की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अपराध रोकने में सिर्फ पुलिस ही जिम्मेदार नहीं है। यदि किसी घटना के दौरान लोग मूकदर्शक बने रहते हैं, तो यह सामाजिक विफलता है। उन्होंने जनता से जाति और धर्म से ऊपर उठकर अपराध के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। वर्तमान डीजीपी विनय कुमार सिंह पर भरोसा जताते हुए पांडेय ने उन्हें एक कुशल और अनुभवी अधिकारी बताया। वहीं, राजनीतिक टिप्पणी में उन्होंने नीतीश कुमार को बिहार का सबसे सफल मुख्यमंत्री बताते हुए कहा कि उनका जाना राज्य के लिए बड़ी क्षति होगी।


















