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धान-गेहूं की खेती छोड़ किया बैंगन की खेती: बैंगन ने बदली तकदीर, अररिया के किसान ने 15 कट्ठा में कमा डाले लाखों

पटना, 04 अप्रैल (पटना डेस्क) बिहार के अररिया जिले से खेती की दुनिया में एक बड़ी बदलाव की कहानी सामने आई है, जहां पारंपरिक खेती को छोड़कर आधुनिक और नकदी फसलों की ओर बढ़ते कदम किसानों की किस्मत बदल रहे हैं। नगराही गांव के युवा किसान सुनील कुमार इस बदलाव की जीती-जागती मिसाल बनकर उभरे हैं। सुनील कुमार ने धान, गेहूं और मक्का जैसी पारंपरिक फसलों के साथ सब्जियों की उन्नत खेती को अपनाया और आज लाखों की कमाई कर रहे हैं।

फिलहाल वे अपनी 15 कट्ठा जमीन पर बैंगन की खेती कर रहे हैं, जो उनके लिए ‘मनी मेकर’ साबित हो रही है।वे बताते हैं कि बैंगन की फसल महज 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है और एक बार फलन शुरू होने के बाद 4 से 6 महीने तक लगातार उत्पादन देती है। यही वजह है कि यह फसल किसानों के लिए नियमित आय का मजबूत जरिया बन रही है। सुनील हर दो दिन पर 200 से 300 किलो बैंगन तोड़कर बाजार में बेचते हैं। सीजन की शुरुआत में उन्हें 40 से 50 रुपये प्रति किलो का भाव मिला, जबकि वर्तमान में भी वे करीब 30 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक्री कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

सिर्फ 15 कट्ठा जमीन से वे एक सीजन में 2 से 3 लाख रुपये तक की कमाई कर लेते हैं। सुनील की सफलता यहीं नहीं रुकती। वे मौसम के अनुसार लौकी, कद्दू, खीरा, झींगा, टमाटर और फूलगोभी की भी खेती करते हैं। सभी फसलों को मिलाकर उनकी कुल आमदनी एक सीजन में करीब 5 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। आज सुनील कुमार इलाके के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनका कहना है कि सही तकनीक और विविधतापूर्ण खेती अपनाकर किसान खेती को घाटे से निकालकर फायदे का सौदा बना सकते हैं।

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