नई दिल्ली, 01 अप्रैल (अशोक “अश्क”) मध्य प्रदेश के बहुचर्चित भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर ली हैं। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निरीक्षण संबंधी आदेश को चुनौती दी गई है। यह मामला लंबे समय से धार्मिक दावों और ऐतिहासिक तथ्यों के टकराव का केंद्र बना हुआ है।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ कर सकती है। यह अपील मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी द्वारा दायर की गई है, जिसमें हाई कोर्ट के उस आदेश का विरोध किया गया है, जिसके तहत 2 अप्रैल से पहले विवादित परिसर का निरीक्षण तय किया गया था। दरअसल, 16 मार्च को हाई कोर्ट की पीठ ने भोजशाला परिसर से जुड़े मामलों की सुनवाई तेज करते हुए निरीक्षण का फैसला लिया था। इसके बाद 28 मार्च को दो न्यायाधीशों ने धार स्थित स्थल का दौरा भी किया।

यह विवाद इस बात को लेकर है कि यह स्थल मूल रूप से देवी सरस्वती का मंदिर है या 11वीं सदी की कमाल मौला मस्जिद। हिंदू पक्ष इसे प्राचीन मंदिर बताता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे मस्जिद मानता है।भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 2000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह संरचना परमार राजाओं के काल में बने एक भव्य मंदिर के अवशेषों पर आधारित है। रिपोर्ट में मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख मंदिर होने के संकेत देते हैं।फिलहाल, 2003 के आदेश के अनुसार यहां मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज की अनुमति है। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से इस संवेदनशील विवाद में नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
















