बक्सर, 15 जून (विक्रांत) नगर परिषद की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वार्ड संख्या-22 स्थित सिंगरही पोखरा की खुदाई योजना में भारी अनियमितता का मामला सामने आया है। सरकारी रिकॉर्ड में कार्य को मार्च 2026 में पूर्ण दिखा दिया गया, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। मौके पर आज भी पोखरा अधूरा पड़ा है और केवल दो स्थानों पर हल्की खुदाई कर काम पूरा होने का दावा कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, सिंगरही पोखरा की मिट्टी खुदाई के लिए 12 जनवरी 2026 को पूर्व कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा संतोष कुमार केशरी के नाम कार्यादेश जारी किया गया था।

दस्तावेजों में खुदाई कार्य की प्राक्कलित राशि 9 लाख 1 हजार 70 रुपये दर्ज है। वहीं स्थल पर लगे शिलापट्ट के अनुसार पोखरे से पानी निकासी के लिए 8 लाख 11 हजार 111 रुपये खर्च किए गए। इस प्रकार कुल 17 लाख 12 हजार 181 रुपये की योजना पर खर्च दर्शाया गया है।आदेश के मुताबिक कार्य एक माह के भीतर पूरा किया जाना था, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी पोखरे की स्थिति जस की तस बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पोखरे की गहराई आसपास की जमीन से मात्र एक से डेढ़ फीट अधिक है। ऐसे में लाखों रुपये खर्च होने के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले में जिम्मेदार अधिकारी भी जवाब देने से बचते नजर आए।

जूनियर इंजीनियर भूलन यादव ने योजना की जानकारी देने से इनकार करते हुए विभाग से पूछने की बात कही। सहायक अभियंता वंदना कुमारी ने भी कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया। वहीं कार्यपालक पदाधिकारी कुमार ऋत्विक ने कहा कि यह कार्य उनके पूर्ववर्ती अधिकारी के कार्यकाल में कराया गया था और विभागीय रिकॉर्ड में इसे मार्च में पूर्ण दर्शाया गया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि विकास कार्यों के नाम पर जनता के पैसे का बंदरबांट किया गया है। शिलापट्ट और विभागीय दस्तावेजों में दर्ज जानकारी तथा मौके की वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।













