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कश्मीर के रक्षक पर सियासी संग्राम: बीजू पटनायक की वीरता बनाम CIA विवाद, संसद से सड़क तक बवाल

नई दिल्ली, 31 मार्च (अशोक “अश्क”) देश के महान स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व ओडिशा मुख्यमंत्री बीजू पटनायक को लेकर इन दिनों राजनीतिक गलियारों में जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। एक ओर उनकी ऐतिहासिक वीरता और देशसेवा की कहानियां सामने आ रही हैं, तो दूसरी ओर हालिया आरोपों ने सियासत को गरमा दिया है।

इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि 1947-48 में जब पाकिस्तान समर्थित कबायली हमलावर कश्मीर पर कब्जे की कोशिश कर रहे थे, तब जवाहरलाल नेहरू के अनुरोध पर बीजू पटनायक ने अद्भुत साहस दिखाया। 27 अक्टूबर 1947 को उन्होंने अपने डकोटा विमान से सिख रेजिमेंट के सैनिकों को लेकर बेहद जोखिम भरी उड़ान भरी और श्रीनगर एयरपोर्ट पर लैंडिंग कराई। उस वक्त दुश्मन एयरपोर्ट के बेहद करीब था। उनकी इस बहादुरी ने कश्मीर को भारत के हाथों से फिसलने से बचा लिया।बीजू पटनायक का योगदान सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। इंडोनेशिया की आजादी में भी उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही। डच सेना के कब्जे के दौरान उन्होंने इंडोनेशियाई नेताओं को सुरक्षित बाहर निकालकर दुनिया भर में सुर्खियां बटोरीं। इस साहसिक कार्य के लिए उन्हें इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान ‘बिंटांग जासा उतमा’ भी मिला और वहां उन्हें नायक का दर्जा दिया गया।हालांकि अब उनके नाम पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बीजू पटनायक पर CIA से जुड़े होने का आरोप लगाकर राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। इसके विरोध में बीजू जनता दल ने कड़ा रुख अपनाते हुए संसद में हंगामा किया और माफी की मांग करते हुए वॉकआउट किया।बीजू पटनायक के बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे मानसिक दिवालियापन करार दिया। वहीं भाजपा के ही नेता बैजयंत पांडा ने दुबे के बयान को अनुचित बताते हुए बीजू पटनायक को सच्चा देशभक्त बताया।गौरतलब है कि बीजू पटनायक एक कुशल पायलट थे और स्वतंत्रता संग्राम में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। उन्होंने ‘कलिंगा एयरलाइंस’ की स्थापना कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया।अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या एक महानायक की विरासत को सियासी बयानबाजी में घसीटना उचित है, या फिर देश को उनके योगदान से प्रेरणा लेनी चाहिए। फिलहाल, यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।

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