समस्तीपुर, 31 मार्च (हर्षिता “अश्क”) जिले में जमीन खरीदने वालों के लिए नया वित्तीय वर्ष बड़ा झटका लेकर आ रहा है। लंबे इंतजार के बाद न्यूनतम मूल्य रजिस्टर (एमवीआर) का पुनरीक्षण पूरा हो गया है और 1 अप्रैल से जमीन की रजिस्ट्री अब बाजार मूल्य के आधार पर होगी। जैसे ही नई दरें लागू होंगी, खरीदारों को पहले के मुकाबले कई गुना ज्यादा निबंधन शुल्क चुकाना पड़ेगा।जानकारी के अनुसार, नई दरों के लागू होने के बाद रजिस्ट्री शुल्क में तीन से चार गुना तक वृद्धि संभव है, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह बढ़ोतरी पांच गुना तक पहुंच सकती है।

अब तक ग्रामीण इलाकों में 2013 और शहरी क्षेत्रों में 2016 की दरों पर रजिस्ट्री हो रही थी, लेकिन बीते दशक में जमीन की कीमतों में भारी उछाल के कारण सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया है।समस्तीपुर जिले में नगर निगम के सभी 43 वार्डों के साथ-साथ नगर परिषद, नगर पंचायत और ग्रामीण क्षेत्रों की जमीन का नया मूल्यांकन कर लिया गया है। खासतौर पर गैर-कृषि और व्यावसायिक जमीनों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखी जाएगी, जिससे सरकार के राजस्व में भी बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है।सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तकनीकी कदम भी उठाए हैं। अब जीआईएस आधारित स्पॉट वेरिफिकेशन एप के जरिए जमीन की सटीक स्थिति और आसपास की गतिविधियों का आकलन किया जाएगा। 200 मीटर की परिधि में होने वाली गतिविधियों की पहचान से जमीन की श्रेणी तय करना आसान होगा और राजस्व चोरी पर लगाम लगेगी।नई व्यवस्था के तहत जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया भी डिजिटल हो रही है। आवेदकों को ई-निबंधन पोर्टल पर लॉगइन कर जमीन से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज करनी होगी, जिसके बाद संबंधित सीओ द्वारा जांच कर जानकारी सीधे मोबाइल पर भेजी जाएगी। इससे फर्जीवाड़ा कम होने की उम्मीद है।वहीं, 80 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा भी शुरू की जा रही है। मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट के जरिए बायोमेट्रिक और दस्तावेजी प्रक्रिया मौके पर ही पूरी की जाएगी।महावीर जयंती के बावजूद 31 मार्च को सभी निबंधन कार्यालय खुले रहे, ताकि लोग पुरानी दरों पर रजिस्ट्री करा सकें। अब 1 अप्रैल से नई दरें लागू होते ही जमीन खरीदना आम लोगों के लिए पहले से कहीं ज्यादा महंगा सौदा साबित होगा।













