पटना, 02 नवम्बर (अविनाश कुमार) बिहार विधान परिषद चुनाव में भाजपा पर भितरघात का आरोप लगाने वाली जदयू की आशंकाएं अब सच साबित होती दिख रही हैं। तिरहुत स्नातक सीट से निर्दलीय निर्वाचित वंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक सीट से जीतने वाले राहुल राज के भाजपा में शामिल होने से सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 31 अक्टूबर को दोनों को भाजपा में शामिल कराया। तिरहुत स्नातक सीट पर वंशीधर ब्रजवासी ने जदयू के अभिषेक झा को 9,147 मतों से हराया था। वहीं, सारण शिक्षक सीट पर राहुल राज ने जदयू के पुष्कर आनंद को 1,815 वोटों से पराजित किया था।

दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत को लेकर जदयू ने भाजपा पर भीतरघात का आरोप लगाया था। हालांकि, निर्दलीय विधान परिषद सदस्यों के किसी राजनीतिक दल में शामिल होने पर दलबदल कानून के तहत सदस्यता समाप्त होने का खतरा है। कानून का मामला सामने आने के बाद दोनों ने भाजपा में शामिल होने से इनकार करते हुए एनडीए में शामिल होने और बाहर से समर्थन देने की बात कही है। इस बीच, भाजपा में शामिल होने संबंधी उनकी सदस्यता की पर्ची भी मीडिया में वायरल होने की चर्चा है। मामले में विधान परिषद सभापति रामवचन राय की भूमिका भी अहम मानी जा रही है।

जदयू नेता रामवचन राय के पास दोनों सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार है। यदि वे अयोग्यता की प्रक्रिया शुरू करते हैं, तो दोनों की सदस्यता खतरे में पड़ सकती है। वहीं, भाजपा-जदयू के बीच राजनीतिक सहमति बनने पर मामला लंबित रहने की संभावना भी जताई जा रही है। ऐसे में दोनों निर्दलीय एमएलसी का भविष्य अब कानूनी और सियासी फैसलों पर निर्भर करेगा।













