पटना, 22 अक्टूबर (अविनाश कुमार) बिहार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की कवायद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पॉलिसी-2026 की समीक्षा की। बैठक में AI कंपनियों, स्टार्टअप और डिजिटल उद्यमों को प्रोत्साहन देने के साथ युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने तथा AI के लिए जरूरी आधारभूत संरचना विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में सरकार ने अगले पांच वर्षों में राज्य के पांच लाख विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य तय किया। इसका मकसद युवाओं को भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करना और रोजगार व कौशल विकास के नए रास्ते खोलना है।

नीति के तहत आधुनिक AI तकनीक, बड़े AI मॉडल और नवाचार को बढ़ावा देने की भी योजना है।हर साल होगा बड़ा AI कार्यक्रमसरकार अगले पांच वर्षों तक प्रत्येक वर्ष राज्य में बड़े स्तर पर AI कार्यक्रम आयोजित करेगी। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों, कंपनियों, स्टार्टअप, निवेशकों और विद्यार्थियों को एक मंच पर लाने की योजना है। सरकार का मानना है कि ऐसे आयोजनों से तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान के साथ नवाचार और निवेश को भी गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से बिहार में AI कंपनियों और डिजिटल उद्यमों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने को कहा। समयबद्ध तरीके से लागू होगी नीतिबैठक में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह ने बिहार AI नीति-2026 के प्रावधानों और उद्देश्यों पर प्रस्तुतीकरण दिया।

इसमें निवेश आकर्षित करने, युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने और AI के विकास के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार करने की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष टीम गठित करने तथा सभी निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने का निर्देश दिया। AI नीति के जरिए सरकार का फोकस रोजगार, कौशल विकास, नवाचार और डिजिटल उद्यमिता को बढ़ावा देने पर है। बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, आईटी सचिव अभय कुमार सिंह और मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।















