पटना, 09 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार की सियासत में लंबे समय से चल रही अटकलों पर अब लगभग विराम लग गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड के कद्दावर नेता और संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने पहली बार खुले शब्दों में संकेत दे दिया है कि राज्य की अगली सरकार में नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी के हाथों में होगा। इस बयान ने बिहार की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।विजय कुमार चौधरी ने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट कहा कि राज्य में भाजपा बड़ी पार्टी है, इसलिए नेतृत्व का निर्णय भी उसी का होगा।

उन्होंने कहा कि जेडीयू पूरी तरह से एनडीए के साथ है और आगे की रणनीति भाजपा तय करेगी। यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अब तक किसी बड़े नेता ने मुख्यमंत्री पद को लेकर इतनी स्पष्टता नहीं दिखाई थी। दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव लड़ने के फैसले के बाद से ही यह चर्चा जोरों पर थी कि बिहार में नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है। इसी बीच जेडीयू के कुछ नेताओं द्वारा नीतीश के बेटे निशांत कुमार का नाम भी उछाला जा रहा था, लेकिन चौधरी के बयान ने इन सभी कयासों पर विराम लगा दिया है।

चौधरी ने यह भी पुष्टि की कि नीतीश कुमार 9 अप्रैल को दिल्ली जाएंगे और 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। उन्होंने इसे संवैधानिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि इसके बाद राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल सकता है। सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ ही कैबिनेट स्वतः भंग हो जाएगी और नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। चर्चा है कि 14 अप्रैल के बाद शुभ मुहूर्त में भाजपा के नेतृत्व में नई एनडीए सरकार का गठन किया जा सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव बिहार की सत्ता में एक नए युग की शुरुआत साबित हो सकता है, जहां पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बनने की पूरी संभावना नजर आ रही है।
















