नई दिल्ली, 04 अप्रैल (अशोक “अश्क”) पश्चिम एशिया में बढ़ती जंग और तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा और कूटनीति को मजबूत साबित किया है। भारतीय जहाज ग्रीन सानवी ने होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित पार किया। यह जहाज लगभग 46,650 टन एलपीजी (रसोई गैस) लेकर जा रहा था और यह भारत का सातवां जहाज है जो इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सफलतापूर्वक निकला।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे जरूरी तेल मार्गों में से एक है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल का परिवहन होता है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के कारण अधिकांश जहाजों को रोक रखा है, लेकिन कुछ दोस्त देशों के जहाजों को गुजरने की इजाजत दी गई है, जिनमें भारत शामिल है। गुजरात के डिप्टी मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने इस सफलता का जश्न सोशल मीडिया पर मनाते हुए ट्वीट किया, “एक और जहाज, एक और जीत भारतीय कूटनीति की।” इस पर मुंबई स्थित ईरान कार्यालय ने जवाब देते हुए कहा कि भारत और खासकर गुजरात ईरान के दिल में विशेष जगह रखते हैं।

उन्होंने 4,000 साल पुराने इतिहास की याद दिलाई, जब लोथल बंदरगाह सिंधु घाटी सभ्यता के समय ईरान के समुद्री किनारे से जुड़ा था।ईरान ने कहा कि वे इस पुराने और ऐतिहासिक व्यापारिक रिश्ते को और मजबूत करना चाहते हैं। अब तक छह भारतीय जहाजों को सुरक्षित रूप से भारतीय बंदरगाहों पर उतारा जा चुका है, जबकि लगभग 17 जहाज अभी भी होर्मुज स्ट्रेट पर इंतजार कर रहे हैं। इस बीच भारत ने संतुलित कूटनीति कायम रखी है—न अमेरिका की नाराजगी, न ईरान से तनाव। जो देश की ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को मजबूती देती है।विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भारत की वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता और रणनीतिक संतुलन का प्रतीक है, जिससे देश न केवल ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति भी मजबूत कर रहा है।

















