पटना, 08 अप्रैल (अविनाश कुमार) पूर्वोत्तर रेलवे की महत्वाकांक्षी हथुआ-भटनी नई रेल लाइन परियोजना बीते 18 वर्षों से अधर में लटकी हुई है। विभागीय स्वीकृति मिलने के बावजूद 79.4 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड का अब तक केवल करीब 40 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका है, जिससे क्षेत्रीय विकास की रफ्तार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्ष 2005-06 में स्वीकृत इस परियोजना का उद्देश्य हथुआ को उत्तर प्रदेश के भटनी से सीधे जोड़ना था।

शुरुआती दौर में भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ी, लेकिन समय बीतने के साथ धन की कमी ने इस परियोजना की गति को थाम दिया। इस रेल लाइन का राजनीतिक और सामाजिक महत्व भी काफी बड़ा है, क्योंकि यह राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के पैतृक गांव फुलवरिया और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के मायके सेलार कला से होकर गुजरती है। पहले चरण में 26 गांवों की जमीन अधिग्रहित कर फुलवरिया से हथुआ तक रेल परिचालन शुरू भी कर दिया गया था।

दूसरे चरण में बथुआ से भटनी तक 57 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जानी थी, लेकिन अब तक केवल 18 गांवों में ही यह प्रक्रिया पूरी हो सकी है। शेष 39 गांवों में भूमि अधिग्रहण धन के अभाव में अटका पड़ा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इस कार्य के लिए करीब 1.81 अरब रुपये की जरूरत है। वर्ष 2018 में पंचदेवरी तक निर्माण कार्य पूरा कर ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया, लेकिन भठवां गांव के आगे काम पूरी तरह ठप है। लंबे इंतजार के बाद अब स्थानीय लोगों की उम्मीदें टूटने लगी हैं, जबकि यह रेल लाइन सिवान होकर जाने की बाध्यता को खत्म कर सकती थी।















