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देसी जुगाड़ का कमाल: साइकिल के कबाड़ से बना ‘आलू निकालने वाला हथियार’, किसानों की बड़ी परेशानी दूर

बहराइच, 31 मार्च (विपिन श्रीवास्तव) खेतों में आलू की खुदाई हमेशा से किसानों के लिए सबसे कठिन काम रहा है। कभी हाथों में चोट लगती है तो कभी कई आलू मिट्टी में ही दबे रह जाते हैं। लेकिन अब उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की ग्रामीण महिलाओं ने ऐसा देसी जुगाड़ तैयार किया है, जिसने इस समस्या का आसान और सस्ता समाधान निकाल दिया है।

दरअसल, महंगे कृषि यंत्रों और बढ़ते ईंधन खर्च के कारण छोटे किसान आधुनिक मशीनों का उपयोग नहीं कर पाते। ऐसे में ग्रामीण महिलाओं ने पुरानी साइकिल के बेकार पड़े मडगार्ड को नया रूप देकर आलू खोदने का अनोखा यंत्र बना डाला है।इस जुगाड़ को तैयार करने के लिए पुराने मडगार्ड को लोहार के पास ले जाकर 4-5 टुकड़ों में कटवाया जाता है। इसके बाद किनारों की धार को अंदर की ओर मोड़ दिया जाता है, ताकि आलू कटे नहीं। फिर इसे इस तरह बनाया जाता है कि दोनों हाथों से आसानी से पकड़ा जा सके।जब महिलाएं इस उपकरण को लेकर खेत में चलती हैं, तो मिट्टी आसानी से हट जाती है और आलू बिना कटे बाहर निकल आते हैं। सबसे खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में हाथों में दर्द नहीं होता और खेतों में मौजूद कांटों से भी बचाव हो जाता है।ग्रामीण महिलाओं का यह जुगाड़ न सिर्फ कम लागत वाला है, बल्कि बेहद प्रभावी भी साबित हो रहा है। जहां एक ओर आधुनिक मशीनों पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, वहीं इस देसी तकनीक से बिना खर्च के बेहतर परिणाम मिल रहे हैं।किसानों के बीच यह अनोखा तरीका तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह जुगाड़ इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधनों के बावजूद ग्रामीण भारत में नवाचार की कोई कमी नहीं है।

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