नई दिल्ली, 10 अप्रैल (अशोक “अश्क”) भारत के स्टार्टअप जगत में एक युवा नाम तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है तिलक मेहता। महज 13 साल की उम्र में शुरू किया गया उनका छोटा सा आइडिया आज ₹100 करोड़ से ज्यादा के टर्नओवर वाली कंपनी में बदल चुका है। कहानी की शुरुआत एक साधारण समस्या से हुई। तिलक अपने चाचा के घर किताबें भूल गए थे और परीक्षा नजदीक थी। उसी दिन सस्ती और तेज डिलीवरी का कोई विकल्प न मिलने पर उनके मन में ‘सेम-डे डिलीवरी’ का आइडिया आया।

यहीं से जन्म हुआ पेपर एन पार्सल का। मुंबई के मशहूर मुंबई डिब्बावाला सिस्टम से प्रेरणा लेकर तिलक ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया, जो कम लागत में तेज डिलीवरी सुनिश्चित करता है। पिता से मात्र 25,000 रुपये लेकर शुरू हुई यह पहल देखते ही देखते बड़े बिजनेस में बदल गई। साल 2018 तक कंपनी ने शहर के भीतर डिलीवरी से आगे बढ़कर लॉजिस्टिक्स और शिपिंग सेक्टर में भी अपनी मजबूत पहचान बना ली। आज कंपनी 3 किलोग्राम तक के पार्सल के लिए डोर-टू-डोर सेवा देती है और इसका नेटवर्क तेजी से विस्तार कर रहा है।

करीब 20 साल के तिलक मेहता का नाम 2026 में देश के टॉप 10 युवा उद्यमियों में शामिल किया जा रहा है। 200 से अधिक कर्मचारियों और 300 डिब्बावालों के साथ उनकी कंपनी मुंबई की लाइफलाइन बन चुकी है। पैथोलॉजी लैब्स, बुटीक स्टोर्स और ब्रोकरेज फर्म्स जैसे कई बड़े क्लाइंट्स को सेवाएं देने वाली यह कंपनी अब लाखों लोगों के लिए भरोसे का नाम बन गई है। तिलक की सफलता यह साबित करती है कि बड़ा सोचने के लिए उम्र नहीं, बल्कि नजरिया मायने रखता है।














