नई दिल्ली, 11 अप्रैल (अशोक “अश्क”) पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई चेन पर पड़े असर के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा दांव पर लग गई है। इसी संकट के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी 9-10 अप्रैल को कतर के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने ऊर्जा मामलों के राज्य मंत्री और कतर एनर्जी के सीईओ साद शेरिडा अल-काबी से अहम मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब ईरान युद्ध के कारण भारत में रसोई गैस की किल्लत गहराती जा रही है।

दोनों नेताओं ने 8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के युद्धविराम का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल-गैस टैंकरों की आवाजाही बहाल होगी। गौरतलब है कि इसी जलमार्ग के बाधित होने से भारत को कतर से एलएनजी की एक भी खेप हाल में नहीं मिल पाई है। युद्ध के चलते कतर के ‘रास लफान’ संयंत्र पर हमले और होर्मुज में बढ़ते खतरे के कारण ‘फोर्स मेज्योर’ लागू किया गया था।

पुरी और अल-काबी ने सुरक्षित समुद्री आपूर्ति की जरूरत पर जोर दिया। वर्तमान में करीब 16 भारतीय जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हैं, जिनकी सुरक्षित वापसी के लिए भारत तेहरान से बातचीत कर रहा है। हालांकि, हाल के दिनों में ‘ग्रीन सांवी’ और ‘ग्रीन आशा’ जैसे 8 एलपीजी टैंकर इस खतरनाक मार्ग को पार करने में सफल रहे हैं, जिससे देश में कुछ राहत मिली है। इस बीच खबरें हैं कि ईरान गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की तैयारी में है, हालांकि इस पर अभी कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। कतर, जो भारत का सबसे बड़ा एलएनजी सप्लायर है, ने भरोसा दिलाया है कि वह हर हाल में आपूर्ति बहाल करेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि 14 दिन का युद्धविराम भारत के लिए “गोल्डन विंडो” है, जिसके जरिए वह अपनी ऊर्जा आपूर्ति को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है।

















