पटना, 22 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। हाल ही में सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद शांत होती सियासी सरगर्मी को अब नई दिशा मिलती दिख रही है। इस बार चर्चा के केंद्र में हैं तेज प्रताप यादव और प्रशांत किशोर की गुपचुप मुलाकात, जिसने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं की यह मुलाकात रात के समय हुई, जिसे महज औपचारिक नहीं माना जा रहा।

खुद तेज प्रताप यादव ने इस मीटिंग को अहम बताते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया, जिसमें दोनों नेताओं की गर्मजोशी साफ नजर आई। उन्होंने लिखा कि इस दौरान जनहित, भविष्य की राजनीति और बदलते सियासी समीकरणों पर गहन चर्चा हुई। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक विश्लेषकों ने नए गठजोड़ और संभावित समीकरणों की चर्चा शुरू कर दी है। सवाल उठने लगे हैं कि क्या तेज प्रताप यादव अपनी अलग राजनीतिक राह तलाश रहे हैं या फिर बिहार में किसी नए मोर्चे की तैयारी चल रही है।

गौरतलब है कि लालू प्रसाद यादव ने अनुशासनहीनता के आरोप में तेज प्रताप यादव को पार्टी और परिवार से अलग कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी बनाई। हालांकि चुनावी मैदान में उन्हें खास सफलता नहीं मिली। वहीं प्रशांत किशोर की जनसुराज मुहिम भी अब तक ठोस राजनीतिक परिणाम नहीं दे पाई है।इन सबके बीच यह मुलाकात कई मायनों में अहम मानी जा रही है। खासकर तब, जब तेज प्रताप यादव समय-समय पर अपने भाई तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधते रहे हैं।

अब देखना दिलचस्प होगा कि यह ‘सीक्रेट मीटिंग’ महज बातचीत तक सीमित रहती है या बिहार की राजनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत बनती है। फिलहाल, इस एक मुलाकात ने राज्य का सियासी पारा फिर से हाई कर दिया है।

















