बक्सर, 20 सितम्बर (विक्रांत) महिला हेल्पलाइन से शुरू हुई पहल, काउंसलिंग और जनप्रतिनिधि के सहयोग से हुआ सम्मानजनक पुनर्वासशादी के महज आठ दिन बाद शराब के नशे में पति की मारपीट से परेशान सुमन (परिवर्तित नाम) की जिंदगी बिखरने लगी। 07 मई 2026 को विवाह के बाद लगातार प्रताड़ना झेल रही सुमन को 22 जुलाई को ससुराल पक्ष ने पिता के साथ मायके भेज दिया। इससे पहले 10 जुलाई को मामला 181 महिला हेल्पलाइन और 112 के माध्यम से सखी वन स्टॉप सेंटर पहुंचा। पीड़िता के पास निजी मोबाइल नहीं था, लेकिन केंद्र की टीम ने उसकी मां के माध्यम से संपर्क स्थापित किया। कार्यालय के व्हाट्सएप पर लिखित शिकायत मिलने के बाद तत्काल मामला दर्ज किया गया।

केंद्र ने सात बार पीड़िता और उसके परिवार को बुलाकर भावनात्मक सहयोग और परामर्श दिया। 05 अगस्त को दबाव में केस बंद करने की इच्छा जताने के बावजूद टीम ने फॉलो-अप जारी रखा।03 सितंबर की संयुक्त काउंसलिंग में पीड़िता को स्त्रीधन और शादी के गहनों पर उसके कानूनी अधिकार की जानकारी दी गई। इसके बाद पति ने लिखित रूप से पत्नी के सभी गहने लौटाने की बात स्वीकार की और गहनों की सूची दर्ज की गई।बाद में पति ने फोन उठाना बंद कर दिया।

केंद्र ने सरपंच और स्थानीय पुलिस के सहयोग से उसे कार्यालय बुलाया। अंततः 18 सितंबर को दोनों पक्षों ने सम्मान और देखभाल का लिखित संकल्प लिया। समझौते के बाद सखी वन स्टॉप सेंटर से पीड़िता की पति के साथ गरिमामय विदाई कराई गई।
















