बक्सर, 25 अक्टूबर (विक्रांत) कभी जिस घर में मां ने अपने बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा किया, उसी घर से बुढ़ापे में बेदखल कर दी गईं दोनों आंखों से दिव्यांग विधवा रामदुलारी देवी को आखिरकार न्याय मिल गया। डुमरांव के अनुमंडल दंडाधिकारी (एसडीएम) राजीव कुमार की पहल पर सिमरी प्रखंड के दूधी पट्टी निवासी रामदुलारी देवी को उनके घर में दोबारा दखल-कब्जा दिलाया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई से बेसहारा महिला को न केवल अपना आशियाना वापस मिला, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता भी सामने आई है।

जानकारी के अनुसार, रामदुलारी देवी के पति सरकारी सेवा में कार्यरत थे। उनके निधन के बाद महिला को पेंशन मिलने लगी, जो बुढ़ापे में उनके जीवनयापन का प्रमुख सहारा थी। आरोप है कि पति की मौत के बाद दोनों बेटों ने उन्हें घर से बाहर कर दिया। जिस उम्र में उन्हें बच्चों के सहारे और देखभाल की सबसे अधिक जरूरत थी, उसी समय उन्हें दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होना पड़ा।इतना ही नहीं, आरोप है कि एक बेटे ने उनकी पेंशन वाले बैंक खाते से ऋण भी ले लिया। ऋण की ईएमआई पेंशन की राशि से चुकाई जा रही थी। इससे पहले से ही कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजार रही दिव्यांग विधवा की आर्थिक परेशानी और बढ़ गई।

एसडीएम की पहल से मिला न्यायअपने अधिकार और आशियाने के लिए संघर्ष कर रही रामदुलारी देवी के मामले में एसडीएम राजीव कुमार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की। उनके आदेश के अनुपालन में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 की धारा-4 और बिहार माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियमावली, 2012 के नियम-5 के तहत महिला को घर में दखल-कब्जा दिलाया गया।

कार्रवाई के दौरान सिमरी सीओ भगवती शंकर पांडेय और सिमरी थाने की एसआई प्रियंका कुमारी के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और ताला तोड़कर रामदुलारी देवी को उनके घर में प्रवेश कराया। लंबे संघर्ष के बाद अपना घर वापस मिलने पर रामदुलारी देवी ने प्रशासन के प्रति आभार जताया। कार्रवाई की क्षेत्र में सराहना हो रही है।














