पटना, 01 अक्टूबर (अविनाश कुमार) बिहार की सियासत में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के ताजा तेवरों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। चिराग ने राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें ऐसी सरकार का हिस्सा होने पर शर्मिंदगी महसूस हो रही है। उनके इस बयान को विपक्ष के हमलों के बीच एनडीए के भीतर बढ़ती राजनीतिक खींचतान के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। चिराग के बयान के बाद उनकी पार्टी के मंत्री संजय सिंह की विभागीय समीक्षा बैठक में अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बन गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों के साथ विभागीय कामकाज की समीक्षा की, जबकि मंत्री की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दी। इसी बीच चिराग पासवान ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी यूपी की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।

उनका कहना है कि गठबंधन हो या न हो, लोजपा चुनाव मैदान में उतरेगी। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह रुख सीटों के लिए संभावित गठबंधन वार्ता में दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकता है। झारखंड और दिल्ली में भाजपा से सीटें हासिल करने के बाद यूपी में भी पार्टी अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने का प्रयास कर सकती है।बिहार में चिराग के तेवरों के बीच राजद और कांग्रेस खेमे में भी संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज है। जदयू के भविष्य के रुख और संभावित गठबंधन बदलाव को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।

इसी क्रम में नीतीश कुमार के बेटे निशांत को मुख्यमंत्री तथा तेजस्वी यादव और चिराग पासवान को उपमुख्यमंत्री बनाने जैसे संभावित समीकरणों की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में है, हालांकि फिलहाल इसका कोई ठोस आधार सामने नहीं आया है।उधर, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को लेकर भी राजनीतिक हलकों में अटकलें हैं। भाजपा और जदयू के बीच विधानसभा में संख्या बल को लेकर भी चर्चा जारी है। ऐसे में चिराग के तेवरों ने बिहार के सियासी समीकरणों पर निगाहें और तेज कर दी हैं।













