पटना, 15 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार में सत्ता परिवर्तन की सुबह एक ऐतिहासिक बदलाव की गवाह बनी। नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण के साथ हुई। अब तक सरकारी कार्यक्रमों में जहां इसके केवल शुरुआती दो अंतरे ही गाए जाते थे, वहीं इस बार सभी छह छंदों का गायन कर एक नई परंपरा की शुरुआत की गई। राजधानी के लोकभवन में आयोजित इस भव्य समारोह में राज्यपाल के आगमन के बाद औपचारिक शुरुआत राष्ट्रगीत से हुई।

पूरा सभागार ‘वंदे मातरम्’ की गूंज से भर उठा। इसके बाद बैंड की धुन पर राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया और फिर शपथ ग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ी।दरअसल, फरवरी 2026 में केंद्र सरकार ने आधिकारिक आयोजनों में वंदे मातरम् के छह अंतरों वाले पूर्ण संस्करण को गाना या बजाना अनिवार्य कर दिया था। इस निर्देश के अनुसार गीत की कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है। यह नियम राष्ट्रीय ध्वज फहराने, राष्ट्रपति और राज्यपाल के आगमन, उनके संबोधन से पहले और बाद में लागू किया गया है, ताकि राष्ट्रगीत के सम्मान और प्रस्तुति में एकरूपता सुनिश्चित की जा सके।

इसी नए प्रोटोकॉल के तहत बिहार का यह शपथ समारोह देश में एक मिसाल बन गया। आजादी के बाद यह पहला अवसर माना जा रहा है जब किसी राज्य के आधिकारिक कार्यक्रम में वंदे मातरम् को पूर्ण रूप से गाया गया हो। इस कदम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का इतिहास भी उतना ही गौरवशाली है। इसे महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में रचा था, जिसे बाद में उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ (1882) में स्थान मिला।

यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति का प्रतीक बन गया। करीब 150 साल पुराना यह राष्ट्रगीत आज भी देश की आत्मा और सम्मान का प्रतीक बना हुआ है, और अब नए नियमों के साथ इसकी गूंज सरकारी मंचों पर और भी प्रभावशाली हो गई है।















