पटना, 05 अक्टूबर (अविनाश कुमार) बिहार में इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) में हेराफेरी का खेल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर गिरफ्तारी के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में राज्य में आईटीसी धोखाधड़ी के 361 मामले सामने आए, जिनमें 124? करोड़ नहीं, बल्कि कुल 1595 करोड़ रुपये से अधिक की राशि शामिल रही। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान सिर्फ दो लोगों की गिरफ्तारी हुई। दोनों गिरफ्तारियां 2025-26 में हुईं। इसके मुकाबले देशभर में इसी अवधि में 718 गिरफ्तारियां दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में बिहार में आईटीसी धोखाधड़ी के 59 मामले सामने आए और 85.60 करोड़ रुपये की हेराफेरी पकड़ी गई। 2024-25 में मामले बढ़कर 101 हो गए और राशि 347.12 करोड़ रुपये पहुंच गई।

2025-26 में स्थिति और गंभीर हुई। मामले बढ़कर 201 हो गए, जबकि हेराफेरी की रकम 1162.53 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। देश में भी आईटीसी फर्जीवाड़े का दायरा लगातार बढ़ा है। 2023-24 में 9190 मामले और 182 गिरफ्तारियां हुईं। 2024-25 में 15,283 मामलों में 178 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 2025-26 में 30,162 मामले सामने आए और 358 गिरफ्तारियां हुईं। आईटीसी घोटाले में बोगस फर्म, फर्जी बिलिंग और शेल कंपनियां बड़ा हथियार बन रही हैं। कई बार नौकरी या छोटे ऋण का झांसा देकर लोगों के दस्तावेज हासिल कर उनके नाम पर फर्जी कंपनियां खड़ी कर दी जाती हैं। कबाड़, कोयला, लोहा, स्टील और अलकतरा जैसे क्षेत्रों में नकद लेन-देन का फायदा उठाकर फर्जी बिलों के जरिये आईटीसी का दावा किया जाता है।

बिहार में पिछले कुछ महीनों में 50 से अधिक शेल फर्मों का पता लगाया गया है। वहीं, जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति से जुड़े प्रावधानों में बदलाव की तैयारी भी चल रही है। सात अक्टूबर को प्रस्तावित जीएसटी काउंसिल बैठक में इस पर सहमति बनने की संभावना है। इसके बाद संसद के शीतकालीन सत्र में संशोधन प्रस्ताव आ सकता है। आईटीसी व्यवस्था में खरीद पर चुकाए गए जीएसटी को बिक्री की देनदारी से घटाने की सुविधा मिलती है। फर्जी नेटवर्क इसी व्यवस्था का दुरुपयोग कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अब चुनौती ऐसे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने और दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई की है।
















