पटना, 08 मई (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में पिछले कई दिनों से चल रहा सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया। बिहार विधान परिषद के सभापति पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच यह पद अब जनता दल यूनाइटेड के खाते में चला गया है। एनडीए सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सहयोगी दलों के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर भी तस्वीर साफ हो गई है। राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को स्वास्थ्य विभाग मिलने को लेकर हो रही है।

माना जा रहा है कि यह फैसला बिहार की राजनीति में नई पीढ़ी को आगे लाने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग राज्य सरकार के सबसे अहम विभागों में माना जाता है, ऐसे में निशांत कुमार को यह जिम्मेदारी मिलना राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।वहीं पूर्व डिप्टी सीएम विजय सिन्हा को कृषि विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में यह विभाग बेहद अहम माना जाता है।

सरकार की कोशिश किसानों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से आगे बढ़ाने की बताई जा रही है। मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के बंटवारे के बाद अब एनडीए सरकार ने सहयोगी दलों के बीच संतुलन साधने का स्पष्ट संदेश दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए यह पूरी कवायद की गई है। बिहार की सियासत में अब नए समीकरणों और नई जिम्मेदारियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।













