पटना, 11 अक्टूबर (अविनाश कुमार) बिहार की छात्राओं और युवतियों को उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ी पहल की है। ‘बिहार की बेटी स्टार्टअप चैलेंज योजना’ के तहत 2100 महिलाओं को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के माध्यम से चयनित प्रतिभागियों को नया व्यवसाय शुरू करने के लिए 50 हजार रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता एवं प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार की इस पहल से बेटियों के नए आइडिया को कारोबार में बदलने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की उम्मीद है। योजना का मुख्य उद्देश्य युवतियों में उद्यमशीलता की भावना विकसित करना और उनके नवाचार को प्रोत्साहित करना है।

जिन छात्राओं और युवतियों के पास कोई नया स्टार्टअप आइडिया अथवा उद्यम शुरू करने की योजना है, उन्हें आर्थिक सहयोग के साथ मार्गदर्शन और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। इससे प्रतिभागियों को अपने कौशल और प्रतिभा का इस्तेमाल कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। नए आइडिया को मिलेगा कारोबार का रूपबदलती अर्थव्यवस्था में स्टार्टअप और तकनीकी नवाचार विकास के अहम माध्यम बन चुके हैं। ऐसे में योजना के जरिए नई सोच, तकनीकी नवाचार और व्यावसायिक संभावनाओं वाले विचारों को बढ़ावा देने की कोशिश होगी। शुरुआती पूंजी मिलने से चयनित युवतियों को व्यवसाय स्थापित करने की बुनियादी जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी।

रोजगार तलाशने वाली नहीं, रोजगार देने वाली बनेंगी बेटियांयोजना का लक्ष्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार सृजित करने के लिए तैयार करना है। खासकर पूंजी के अभाव में अपने बेहतर विचार को कारोबार में तब्दील नहीं कर पाने वाली युवतियों के लिए यह पहल अहम साबित हो सकती है। महिला उद्यमियों की संख्या बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने और राज्य की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है। छोटे व्यवसायों और स्टार्टअप के विस्तार से स्थानीय संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के साथ बिहार की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है।














