पटना, 01 मई (अविनाश कुमार) बिहार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़ी सफाई अभियान चलाते हुए पटना जिले में प्रशासन ने 2.99 लाख संदिग्ध राशन कार्ड रद्द कर दिए हैं। इस कार्रवाई से फर्जी लाभुकों में हड़कंप मच गया है, वहीं जरूरतमंद परिवारों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ी है। जांच में बड़ी संख्या में ऐसे नाम सामने आए जो नियमों के तहत पात्र ही नहीं थे। खाद्य, उपभोक्ता एवं संरक्षण विभाग की ओर से 3.16 लाख संदिग्ध राशन कार्डों की सूची भेजी गई थी। अनुमंडल स्तर पर सत्यापन के बाद 2,99,946 कार्डों को अयोग्य घोषित कर रद्द कर दिया गया। फिलहाल 16,377 कार्डों की जांच अभी भी जारी है, जिन पर जल्द फैसला होगा।

पड़ताल के दौरान कई लाभुक सरकारी नौकरी में, आयकरदाता या चारपहिया वाहन के मालिक पाए गए। इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी मिले जो लंबे समय से जिले से बाहर रह रहे थे या राशन नहीं ले रहे थे। ऐसे सभी अपात्रों को सूची से बाहर कर दिया गया। एडीएम आपूर्ति रवींद्र कुमार दिवाकर ने बताया कि अधिकांश संदिग्ध कार्डों की जांच पूरी कर ली गई है और 2.99 लाख कार्ड रद्द किए जा चुके हैं। शेष मामलों की जांच अंतिम चरण में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पात्रता मानकों से बाहर पाए गए किसी भी व्यक्ति को अब लाभ नहीं मिलेगा।

पटना जिले में बाढ़ में 56,248, दानापुर में 62,104, मसौढ़ी में 22,559, पालीगंज में 30,078, पटना सिटी में 14,721 और पटना सदर में सबसे अधिक 1,14,236 कार्ड रद्द किए गए हैं। यह आंकड़े प्रशासनिक सख्ती को दर्शाते हैं। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि राशन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। साफ है कि अब सिर्फ वास्तविक जरूरतमंदों को ही सरकारी अनाज का लाभ मिलेगा और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह लगाम लगाने की तैयारी है।













