बक्सर, 29 जुलाई (विक्रांत) पूर्व मध्य रेल मुख्यालय, हाजीपुर में बुधवार को क्षेत्रीय रेल राजभाषा कार्यान्वयन समिति की 87वीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें राजभाषा हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक की अध्यक्षता अपर महाप्रबंधक अमरेन्द्र कुमार ने की। उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि पूर्व मध्य रेल ‘क’ क्षेत्र में स्थित है, इसलिए अधिकांश सरकारी कार्य हिंदी में होना चाहिए। उन्होंने सभी अधिकारियों से छोटे-छोटे आदेश, टिप्पणियां और कार्यालयीन पत्राचार हिंदी में करने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे अधीनस्थ कर्मचारियों में भी हिंदी में कार्य करने की सकारात्मक प्रेरणा मिलेगी। अपर महाप्रबंधक ने कहा कि हिंदी की व्यापकता और उपयोगिता सर्वमान्य है तथा अब समय आ गया है कि दैनिक कार्यालयीन कार्य पूरी तरह हिंदी में किए जाएं।

उन्होंने सरल, सहज और व्यवहारिक हिंदी के प्रयोग पर बल देते हुए कहा कि भाषा संवाद और अभिव्यक्ति का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने सभी अधिकारियों को राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3) सहित केंद्र सरकार के सभी राजभाषा निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। बैठक के दौरान राजभाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए कार्मिक विभाग को अंतर्विभागीय राजभाषा चल शील्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान प्रधान मुख्य कार्मिक अधिकारी सुरेश चन्द्र श्रीवास्तव ने प्राप्त किया। वहीं मुख्य राजभाषा अधिकारी सह प्रधान मुख्य सिगनल एवं दूरसंचार इंजीनियर सविता गेडाम ने कहा कि राजभाषा के व्यापक प्रयोग के लिए मजबूत इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। उन्होंने सभी विभागों से संघ की राजभाषा नीति के अनुरूप शत-प्रतिशत कार्य हिंदी में करने का आह्वान किया तथा पिछली तिमाही में राजभाषा विभाग की उपलब्धियों की जानकारी भी दी।

उप महाप्रबंधक (राजभाषा) केशव त्रिपाठी ने बैठक का संचालन करते हुए कहा कि आपसी सहयोग से ही हिंदी के प्रयोग-प्रसार को नई गति मिल सकती है। उन्होंने बताया कि महाप्रबंधक के संरक्षण और मुख्य राजभाषा अधिकारी के मार्गदर्शन में राजभाषा विभाग लगातार प्रभावी कार्य कर रहा है। बैठक में मंडलों, कारखानों और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने राजभाषा की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इस अवसर पर क्षेत्रीय राजभाषा प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारी एवं कर्मचारियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। अंत में राजभाषा अधिकारी अनिल कुमार शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

















