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पूर्वी कमान को नई धार देकर हुए विदा, लेफ्टिनेंट जनरल तिवारी का ऐतिहासिक कार्यकाल खत्म, मजबूत विरासत छोड़ गए

नई दिल्ली, 01 अप्रैल (अशोक “अश्क”) देश की सबसे संवेदनशील सैन्य सीमाओं की सुरक्षा को नई मजबूती देने वाले लेफ्टिनेंट जनरल रामचंद्र तिवारी ने 31 मार्च को सेवानिवृत्ति के साथ भारतीय सेना की पूर्वी कमान की कमान औपचारिक रूप से छोड़ दी। लगभग 40 वर्षों के गौरवशाली सैन्य करियर के बाद विदा लेते हुए तिवारी एक सशक्त, आधुनिक और तकनीक-सक्षम सैन्य ढांचा पीछे छोड़ गए हैं।

कोलकाता स्थित मुख्यालय वाली पूर्वी सेना कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में उनका कार्यकाल कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों के लिए याद किया जाएगा। जनवरी 2024 में पदभार संभालने के बाद उन्होंने न सिर्फ पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा को मजबूती दी, बल्कि सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण और विस्तार पर भी विशेष जोर दिया। उनके नेतृत्व में पूर्वी कमान ने ऑपरेशनल तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया। अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम सेक्टरों में वास्तविक नियंत्रण रेखा की सुरक्षा को लेकर उन्होंने सटीक और दूरदर्शी रणनीति अपनाई। पूर्वोत्तर क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए संतुलित दृष्टिकोण के साथ आतंकवाद विरोधी अभियानों को भी नई गति दी गई। तकनीकी नवाचार उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी पहचान रहा। आधुनिक सैन्य प्रणालियों के समावेशन और सूचना आधारित निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देकर उन्होंने सेना की कार्यक्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर उन्होंने सेना, अर्धसैनिक बलों और नागरिक प्रशासन के बीच तालमेल को मजबूत किया। सिर्फ रणनीतिक ही नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी उनका नेतृत्व सराहनीय रहा। सैनिकों के मनोबल, कल्याण और नेतृत्व विकास पर विशेष ध्यान देते हुए उन्होंने संगठन में पेशेवर उत्कृष्टता और समावेशिता को बढ़ावा दिया।कमान छोड़ने से पहले तिवारी ने विजय दुर्ग स्थित विजय स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और सभी रैंकों के सैनिकों के प्रति आभार जताया। सेना ने भी उनके उत्कृष्ट नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति योगदान को सलाम किया है।1987 में कुमाऊं रेजिमेंट में कमीशन प्राप्त करने वाले तिवारी ने अपने करियर में कई दुर्गम मोर्चों पर जिम्मेदारियां निभाई। उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। उनका कार्यकाल पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा के इतिहास में एक मजबूत अध्याय के रूप में दर्ज रहेगा।

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