नई दिल्ली, 01 मई (अशोक “अश्क”) राजधानी दिल्ली में जल संकट को लेकर बड़ा अभियान शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘कैच द रेन 2026’ की शुरुआत करते हुए साफ कर दिया कि अब पानी का संकट भविष्य की नहीं, बल्कि वर्तमान की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। आरके पुरम सेक्टर-13 स्थित सर्वोदय विद्यालय में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का उद्घाटन करते हुए उन्होंने जल संरक्षण को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पानी का कोई विकल्प नहीं है।

“कोल्ड ड्रिंक या जूस बनाए जा सकते हैं, लेकिन पानी सिर्फ प्रकृति देती है। इसकी अहमियत वही समझता है, जो एक-एक बूंद के लिए तरसता है।” उन्होंने चेतावनी दी कि पानी को ट्रीट कर दोबारा उपयोग में लाना बेहद महंगा है, इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा समाधान है। सरकार ने अब उन इलाकों पर फोकस बढ़ाया है, जहां लंबे समय से पानी की किल्लत रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि “आधी दिल्ली जो कभी प्यासी थी, वहां अब पानी पहुंचाया जा रहा है।” हर ब्लॉक में एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है, ताकि पानी का पुनः उपयोग संभव हो सके। इस दौरान उन्होंने संकेत दिए कि भूजल के अंधाधुंध दोहन पर जल्द सख्ती होगी।

भविष्य में केवल उन्हीं लोगों को भूमिगत जल उपयोग की अनुमति मिलेगी, जो रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अपनाएंगे। जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि दिल्ली में करीब 1 लाख रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की जरूरत है, जबकि अभी तक मात्र 15 हजार ही स्थापित हो पाए हैं। वहीं सांसद बांसुरी स्वराज ने भी जल संचय को भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बताया। कार्यक्रम में छात्रों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए जल संरक्षण का संदेश दिया। ‘जहां गिरे, वहीं बचाओ’ के संकल्प के साथ शुरू हुआ यह अभियान अब जनभागीदारी की ओर बढ़ता नजर आ रहा है, जो राजधानी को जल संकट से उबारने की बड़ी उम्मीद बन सकता है।













