दिल्ली, 14 मई (अशोक “अश्क”) प्रधानमंत्री की अपील के बाद राजधानी दिल्ली में ईंधन बचत और अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने के लिए सरकार ने बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है। इस नई रणनीति के तहत सरकारी दफ्तरों में हर सप्ताह दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू किया जाएगा। साथ ही निजी कंपनियों और कॉरपोरेट दफ्तरों को भी इसी मॉडल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार ने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के काफिलों में कटौती करने का फैसला लिया है। अधिकारियों को मिलने वाले पेट्रोल और डीजल कोटे में भी 20 प्रतिशत तक कमी की जाएगी।

अब तक हर महीने 200 से 250 लीटर ईंधन पाने वाले अधिकारियों को सीमित मात्रा में तेल मिलेगा। माना जा रहा है कि इससे सरकारी खर्च में बड़ी बचत होगी। योजना के तहत सप्ताह में एक दिन ‘नो-व्हीकल डे’ मनाने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि निजी वाहनों के उपयोग को कम किया जा सके। इसके अलावा जो अधिकारी वाहन भत्ता मिलने के बावजूद मेट्रो, बस या अन्य सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करेंगे, उन्हें 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त इंक्रीमेंट देने की तैयारी है। सरकार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी फोकस कर रही है।

बसों के रूट और समय में बदलाव कर यात्रियों को बेहतर सुविधा देने की योजना बनाई गई है। साथ ही 50 प्रतिशत सरकारी बैठकों को वर्चुअल मोड में आयोजित करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार ने अदालतों से भी अधिकतर मामलों की सुनवाई ऑनलाइन माध्यम से करने की अपील की है। सोमवार को अधिक से अधिक लोगों को मेट्रो से सफर करने के लिए जागरूक किया जाएगा। अगले तीन महीनों तक बड़े आयोजनों को सीमित रखने की भी तैयारी है। सरकार का दावा है कि इन कदमों से ईंधन की खपत घटेगी, ट्रैफिक दबाव कम होगा और आर्थिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।















