समस्तीपुर, 15 मई (हर्षिता “अश्क”) भारतीय रेलवे के बहुप्रतीक्षित दरभंगा-समस्तीपुर रेलखंड दोहरीकरण परियोजना का कार्य आखिरकार पूरा हो गया। सीआरएस निरीक्षण के बाद गुरुवार देर रात इस रूट पर पहली मालगाड़ी को हरी झंडी दी गई, जबकि शुक्रवार सुबह से सभी दूरगामी और सवारी ट्रेनें निर्धारित समय पर इस रेलखंड से गुजरने लगीं। वर्षों से दोहरीकरण की मांग कर रहे यात्रियों के लिए यह बड़ी सौगात मानी जा रही है। जानकारी के अनुसार, 38 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड के दोहरीकरण का प्रारंभिक एस्टीमेट 519.28 करोड़ रुपये था, जिसे बाद में संशोधित कर 844 करोड़ रुपये किया गया।

इसी संशोधित लागत के आधार पर परियोजना को पूरा कराया गया। हालांकि अभी भी कुछ कार्य अधूरे हैं। रामभद्रपुर स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज का निर्माण बाकी है, जबकि थलवाड़ा और हायाघाट स्टेशन के सरकुलेशन एरिया में यात्री सुविधाओं से जुड़े कुछ कार्य शेष हैं। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक ये सभी कार्य चालू वित्तीय वर्ष में पूरे कर लिए जाएंगे। सीआरएस से परिचालन की अनुमति मिलने के बाद ट्रेनों की आवाजाही शुरू हो गई है, लेकिन पुल संख्या 15, 16 और 17 पर फिलहाल गति सीमा 50 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि नॉन इंटरलॉकिंग कार्य और मानसून को ध्यान में रखते हुए यह प्रतिबंध मानसून समाप्त होने तक लागू रहेगा।

इधर, दिल्ली स्थित रेल भवन में आयोजित रेलवे स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में सांसद डॉ. गोपालजी ठाकुर ने कहा कि दरभंगा-समस्तीपुर रेलखंड का दोहरीकरण मिथिलांचल के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बताया कि 624 करोड़ रुपये की लागत से यह परियोजना पूरी की गई है और जल्द ही इसका औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा।बैठक में दरभंगा रेलवे स्टेशन को अमृत भारत योजना के तहत वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनाने, लहेरियासराय एवं सकरी स्टेशन के विकास, दरभंगा-नरकटियागंज रेललाइन दोहरीकरण तथा मिथिला सर्किट कॉरिडोर निर्माण जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

















