आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में मध्यप्रदेश, उज्जैन से सुप्रसिद्ध कवि आर के जैन “राकेश” जी की एक ग़ज़ल

तीर अब दिल पर चलाना छोड़ दे !
देख अब यूँ मुस्कुराना छोड़ दे !!
चोट अब दिल पर लगाना छोड़ दे !
बेवजह हम को सताना छोड़ दे !!
बिन तेरे अब रात ये कटती नही !
ख्वाब मे आकर यूँ जाना छोड़ दे !!
ग़र यकीं जो प्यार पर मेरे नहीं !
फिर मेरी यादों मे आना छोड़ दे !!
मैं हक़ीक़त की ज़मीं पर हूँ खड़ा,
ख़्वाब तू मुझको दिखाना छोड़ दे।
कितनें लेगी इम्तिहां तू जिंदगी !
अब मुझे तू आजमाना छोड़ दे !!
डूबकर गर लिख सके “राकेश” लिख !
या कलम को तू उठाना छोड़ दे !!
~ आर के जैन “राकेश”

















