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नशे में नशा कर रहे हो

आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में बिहार, समस्तीपुर से सुप्रसिद्ध कवि प्रवीण कुमार ‘चुन्नू’ जी की एक ग़ज़ल

ऐलान ये क्या नया कर रहे हो।

फिर कोई मसला खड़ा कर रहे हो।

तुम पे हमेशा भरोसा किया है,

पूछा नहीं कैसे क्या रहे हो।

दरिया का रुख मोड़ देने की सोचो,

क्या बारिशों से दुआ कर रहे हो।

घर क्यूं नहीं लौटा सूरज अभी तक,

कब दिन ढला कुछ पता कर रहे हो।

आँगन की रौनक ये मासूम पौधे,

कैसे इन्हे तुम बड़ा कर रहे हो।

ख़ुद ही जवानी नशा ही नशा है,

क्या इस नशे में नशा कर रहे हो।

एहसान भी तो जताते बहुत हो,

ये फर्ज कैसा अता कर रहे हो।

मेरे ही हिस्से का देते हो मुझको,

करते हो जैसे दया कर रहे हो।

अपनी भलाई का क्या सोचना फिर,

सबका अगर तुम भला कर रहे हो।

~ प्रवीण कुमार ‘चुन्नू’

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