नई दिल्ली, 12 अप्रैल (अशोक “अश्क”) भारत-चीन तनाव के बीच एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। चीन द्वारा भारतीय क्षेत्रों के नाम बदलने की कोशिशों पर भारत ने सख्त रुख अपनाते हुए दो टूक जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट कहा कि भारत अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा और चीन के “मनगढ़ंत नामकरण” के प्रयास पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश समेत सभी संबंधित क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं और रहेंगे।

चीन द्वारा झूठे दावे और निराधार कथाएं गढ़ने से जमीनी हकीकत नहीं बदल सकती। भारत ने यह भी चेताया कि इस तरह की हरकतें दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों में बाधा डालती है। गौरतलब है कि चीन पहले भी दिसंबर 2021 में भारत के 21 स्थानों के नाम बदलने की कोशिश कर चुका है। उसने तवांग से लेकर अंजॉ तक कई इलाकों के नाम चीनी, तिब्बती और रोमन लिपि में जारी किए थे, जिसे भारत ने उसी समय खारिज कर दिया था। इसी बीच 9 अप्रैल 2026 को लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनाइक ने तवांग जिले में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास स्थित खेन्जेमाने का दौरा किया।

उन्होंने कठिन परिस्थितियों में तैनात सैनिकों का हौसला बढ़ाते हुए उन्हें हर परिस्थिति में सतर्क रहने का संदेश दिया। अधिकारियों के अनुसार, दुर्गम इलाकों और प्रतिकूल मौसम के बीच स्थित यह चौकी भारत की सुरक्षा प्रतिबद्धता का प्रतीक है। राज्यपाल की यह यात्रा न केवल सैनिकों के मनोबल को मजबूत करने वाली रही, बल्कि यह भी संकेत देती है कि भारत अपनी सीमाओं की रक्षा को लेकर पूरी तरह सजग और प्रतिबद्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की ऐसी गतिविधियां क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा सकती हैं, लेकिन भारत ने अपने स्पष्ट और सख्त रुख से यह जता दिया है कि वह किसी भी स्थिति में अपनी संप्रभुता से पीछे हटने वाला नहीं है।

















