नई दिल्ली, 27 सितम्बर (अशोक “अश्क”) लखनऊ यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई पूरी करने के करीब चार दशक बाद जस्टिस विक्रम नाथ देश के अगले मुख्य न्यायाधीश (CJI) का पद संभालने जा रहे हैं। उनके CJI बनने की खबर के साथ ही यूनिवर्सिटी का करीब सौ साल पुराना लॉ विभाग एक बार फिर सुर्खियों में है। यूनिवर्सिटी ने वर्ष 2018 में जस्टिस नाथ को विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार से सम्मानित किया था।जस्टिस विक्रम नाथ ने 1986 में लखनऊ यूनिवर्सिटी के शिया पीजी कॉलेज से लॉ की पढ़ाई पूरी की। अगले वर्ष उन्होंने वकील के रूप में पंजीकरण कराया। वर्ष 2004 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त होने से पहले उन्होंने 17 साल से अधिक समय तक वकालत की।

2006 में वे स्थायी न्यायाधीश बने। अगस्त 2021 में सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति से पहले वह गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे।15 अप्रैल 2022 को जस्टिस नाथ शिया पीजी कॉलेज में हजरत इमाम मोहम्मद तकी बिल्डिंग के उद्घाटन समारोह में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने छात्र जीवन की यादें साझा करते हुए कहा था कि कॉलेज ने उनकी सफलता में बड़ा योगदान दिया। उन्होंने कहा था कि अगर शिया कॉलेज नहीं होता तो वह कुछ भी नहीं होते। गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहते हुए उन्होंने कोर्ट की कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग शुरू कराई थी। इसे देश में किसी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की ओर से ऐसी शुरुआती पहलों में माना गया। उनकी पत्नी प्रो. संगीता श्रीवास्तव भी शिक्षाविद हैं और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की कुलपति रह चुकी हैं।

शिया पीजी कॉलेज के प्रवक्ता प्रदीप शर्मा के मुताबिक, जस्टिस नाथ ने समारोह में अपने छात्र जीवन की यादें साझा की थीं। वहीं, पूर्व डीन प्रो. एके अवस्थी ने लॉ विभाग की समृद्ध परंपरा का उल्लेख किया। 1921 में स्थापित इस फैकल्टी ने न्यायपालिका और कानून के क्षेत्र को कई नामी हस्तियां दी हैं। प्रो. आरयू सिंह जैसे शिक्षाविदों ने विभाग को नई दिशा दी। उनके छात्रों में संवैधानिक कानून के विशेषज्ञ वीएन शुक्ला भी शामिल रहे। जस्टिस एएस आनंद, जस्टिस सगीर अहमद और जस्टिस ब्रजेश कुमार जैसे नाम भी इस संस्थान से जुड़े रहे हैं।

















