पटना, 22 अप्रैल (अविनाश कुमार) पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। गैस सिलेंडर की डगमगाती सप्लाई ने हालात ऐसे बना दिए हैं कि अब खाना पकाने के लिए कोयले का सहारा लेना पड़ सकता है। बिहार सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए बड़ा फैसला लेते हुए राशन कार्डधारियों को हर महीने एक क्विंटल यानी 100 किलोग्राम कोयला उपलब्ध कराने की तैयारी कर ली है। सरकार के इस कदम ने लोगों को चौंका दिया है। जानकारी के अनुसार, यह व्यवस्था केवल राशन कार्डधारियों के लिए लागू होगी।

बिहार सरकार ने मंगलवार को सभी जिलाधिकारियों और परिवहन विभाग को निर्देश जारी कर कोयले की सप्लाई चेन को जल्द से जल्द सक्रिय करने को कहा है। ऊर्जा संकट के पीछे पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को मुख्य कारण बताया गया है, जिससे गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, गैस सिलेंडर की कमी से राज्य के कई इलाकों में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इसी को देखते हुए आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आने वाले परिवारों को कोयला उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि खाना पकाने में दिक्कत न हो। इस पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए बिहार स्टेट माइनिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (BSMCL) को अहम जिम्मेदारी दी गई है। यह संस्था कोल इंडिया से कोयले की मांग करेगी और फिर थोक विक्रेताओं के माध्यम से जिलों तक इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। जिला स्तर पर कोयले के वितरण के लिए एक या उससे अधिक थोक विक्रेताओं का चयन किया जाएगा।

सप्लाई चेन को सुचारु बनाने के लिए थोक विक्रेताओं से तीन प्रतिशत हैंडलिंग चार्ज और बीएसएमसीएल को दो प्रतिशत मार्जिन मनी देने की व्यवस्था तय की गई है। परिवहन विभाग की निगरानी में जिला टास्क फोर्स कोयले की ढुलाई और वितरण दर तय करेगी, ताकि कोल हेड से लेकर राशन दुकान तक आपूर्ति में कोई बाधा न आए। हालांकि, इस फैसले ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं, खासकर उन लोगों को लेकर जिनके पास राशन कार्ड नहीं है। फिलहाल उनके लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में युद्ध की आंच अब रसोई तक पहुंच चुकी है, और आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।














